logo_banner
Breaking
  • ⁕ DRI नागपुर की बड़ी कार्रवाई, 2 करोड़ रुपये का 522 किलो से अधिक गांजा जब्त किए; दो लोग गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ Gondia: कलपाथरी में बाघ के हमले में युवक की मौत, बकरियों के लिए चारा लेने जंगल गया था मृतक ⁕
  • ⁕ Amravati: पेपर लीक मामले को लेकर अमरावती में NSUI का मशाल मार्च; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग ⁕
  • ⁕ MLC Election: नामांकन वापस लेना शैलेश अग्रवाल और साहेबराव कांबले को पड़ा भारी, कांग्रेस ने दोनों नेताओं को पार्टी से किया निष्काषित ⁕
  • ⁕ विदर्भ में मौसम का यू-टर्न: अमरावती, वर्धा और चंद्रपुर समेत कई जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट'; 40km की रफ्तार से आंधी और भारी बारिश की चेतावनी ⁕
  • ⁕ PF ब्याज पर बड़ा अपडेट: 'घोषणा' से 'जेब' तक का सफर; जानें जून-जुलाई में आपके खाते में क्या होने वाला है! ⁕
  • ⁕ विदर्भ सहित राज्य के 247 नगर परिषदों और 147 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित, देखें किस सीट पर किस वर्ग का होगा अध्यक्ष ⁕
  • ⁕ अमरावती में युवा कांग्रेस का ‘आई लव आंबेडकर’ अभियान, भूषण गवई पर हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ⁕
  • ⁕ Gondia: कुंभारटोली निवासियों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नगर परिषद पर बोला हमला, ‘एक नारी सबसे भारी’ के नारों से गूंज उठा आमगांव शहर ⁕
Nagpur

रंजीत सफेलकर को बड़ी राहत, रंगदारी मामले में अदालत ने किया बरी


नागपुर: जेल में बंद श्रीराम सेना अध्यक्ष रंजीत सफेलकर को अदालत से बड़ी राहत मिली है। रंगदारी मामले में अदालत ने सफेलकर सहित उसके सभी सहयोगियों को बरी कर दिया है। 

कलमना पुलिस थाने में दुकान मालिक रवि डिकोंडवार ने रंजीत और उसके साथियों के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप था कि आरोपी रंजीत दोनों दुकानों को खरीदना चाहता था। रवि के मन करने पर आरोपी ने उनके साथ मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी। आरोपियों ने दुकान की जगह पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर वहां पर कार्यालय शुरू कर दिया।  जगह का किराया मांगने को लेकर उन्होंने दुकान के मालिक डिकोड़वार को जान से मारने की धमकी दी। 

पीड़ित की  शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू की। पुलिस ने इस मामले में नौ लोगों से पूछतछ की और उनके बयान दर्ज किये गए। सुनवाई के दौरान पीड़ित के वकील ने फोन रिकॉर्डिंग को भी साक्ष्य के तौर अदालत में पेश किया। लेकिन बचाव पक्ष के वकील प्रकाश जयसवाल ने तर्क दिया कि यह पूरी तरह से सिविल विवाद है और पुलिस ने रंजीत सफेलकर को झूठे मामलों में फंसाने के लिए इसे अपराध में बदल दिया है।

बचाव पक्ष के वकील ने साबित किया कि फोन की कोई बरामदगी नहीं हुई, साथ ही विवादित स्थान का स्वामित्व शिकायतकर्ता के पास नहीं है, मामला अविश्वसनीय साक्ष्यों पर आधारित है। जिसके बाद कोर्ट ने रंजीत सफेलकर सहित चार लोगों को बरी कर दिया।