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Chandrapur

Chandrapur: मेयर के फैसले पर अपने ही बागी; समूह नेता और सभापति आक्रामक, नई ई-टेंडर की मांग


- पवन झबाडे

चंद्रपुर: चंद्रपुर महानगरपालिका की राजनीति में नाले सफाई के ठेके को लेकर इन दिनों हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है। जांच के घेरे में फंसी ‘संत मीराबाई सेवा सहकारी संस्था’ को राहत देने के फैसले पर सत्ताधारी भाजपा में ही फूट पड़ती नजर आ रही है। मेयर द्वारा मंजूरी दिए गए प्रस्ताव का भाजपा के ही गट नेता और स्थायी समिति सभापति ने कड़ा विरोध किया है, जिससे मनपा में खलबली मच गई है।

30 अप्रैल को हुई महासभा में विषय क्रमांक 3 के तहत ‘संत मीराबाई सेवा सहकारी संस्था’ को अतिरिक्त 150 मजदूर, 6 ट्रैक्टर और 6 वाहन चालक उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। खास बात यह है कि इस प्रस्ताव को भाजपा के मेयर और सत्ताधारी गुट का समर्थन मिला था, लेकिन अब भाजपा के गट नेता शेखर शेट्टी और स्थायी समिति सभापति मनस्वी गिऱ्हे ने ही इस फैसले को लिखित पत्र के जरिए चुनौती दी है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर असमंजस की स्थिति बन गई है।

आखिर विवाद क्या है?
इस संस्था पर पहले ही आरोप लग चुका है कि उसने नाले सफाई का ठेका हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए। इस शिकायत के बाद स्थायी समिति सभापति ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। हालांकि, जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है और संस्था को ‘क्लीन चिट’ भी नहीं मिली है। ऐसे में अतिरिक्त काम देना गलत होगा, यह रुख शेखर शेट्टी और मनस्वी गिऱ्हे ने लिया है। उन्होंने मांग की है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह काम संस्था को न दिया जाए और इसके लिए नई ई-टेंडर प्रक्रिया लागू की जाए।

क्या गठबंधन में बढ़ेगा तनाव?
चंद्रपुर मनपा में भाजपा और ठाकरे गुट का गठबंधन पहले से ही चर्चा में है। ऐसे में इस ठेके को लेकर सत्ताधारी गुट के भीतर शुरू हुआ यह ‘शीत युद्ध’ गठबंधन में दरार डाल सकता है, ऐसी चर्चा राजनीतिक हलकों में हो रही है। सत्ताधारियों में एकजुटता की कमी से आने वाले समय में यह मुद्दा और भड़कने की संभावना जताई जा रही है।

‘वह’ पार्षद किसके साथ?
इस पूरे विवाद में पार्षदों की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। शिवसेना की पार्षद किरण कोतपल्लीवार ने पार्टी के ज्ञापन पर हस्ताक्षर नही किया है, जिससे उनके रुख को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। वहीं, भाजपा समूह नेता शेखर शेट्टी के ज्ञापन को संजय कंचर्लावार और सुभाष कासनगोट्टूवार ने समर्थन दिया है। इस गुटबाजी से भाजपा के अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं।