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Chandrapur

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के पत्र का कांग्रेस को फायदा, मनपा में सत्ताधारी भाजपा को झटका; नई राजनीतिक हलचल शुरू


चंद्रपुर: महानगरपालिका में महिला एवं बाल कल्याण समिति तथा जोन समितियों के चुनाव में भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आई है। इस स्थिति का सीधा फायदा कांग्रेस को मिला है। 

महिला एवं बाल कल्याण समिति के सभापति पद के चुनाव में कांग्रेस की पार्षद संगीता भोयर ने जीत दर्ज की। 12 सदस्यीय समिति में भाजपा और कांग्रेस के पास बराबर 6-6 वोट थे, लेकिन शिवसेना (शिंदे गुट) की पार्षद डीलन केलझरकर मतदान के दौरान अनुपस्थित रहीं, जिससे पूरा समीकरण बदल गया। नतीजतन भोयर को 6 वोट मिले, जबकि भाजपा की सुनीता जायसवाल को 5 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा।

यदि केलझरकर मतदान में शामिल होतीं, तो मुकाबला 6-6 की बराबरी पर पहुंच जाता और फैसला ‘ईश्वर चिट्ठी’ के जरिए करना पड़ता। सूत्रों के अनुसार, केलझरकर को सभापति पद का आश्वासन दिया गया था, लेकिन भाजपा ने सुनीता जायसवाल को उम्मीदवार बना दिया, जिससे नाराज होकर उन्होंने मतदान से दूरी बनाई।

वहीं, जोन क्रमांक 2 और 3 के चुनाव में भाजपा की अचानक माघार भी चर्चा का विषय रही। जोन 2 से भाजपा उम्मीदवार ज्योति जीवने और जोन 3 से जितेश कुलमेथे ने ऐन वक्त पर अपना नामांकन वापस ले लिया। बताया जा रहा है कि यह निर्णय भाजपा के भीतर सुधीर मुनगंटीवार और किशोर जोरगेवार गुटों के बीच चल रहे विवाद का परिणाम है। 

प्रदेश कार्यालय की ओर से जोन 1 के लिए रवि लोणकर और महिला एवं बाल कल्याण सभापति पद के लिए सुनीता जायसवाल के नाम भेजे गए थे, जो मुनगंटीवार समर्थक माने जाते हैं। इससे जोरगेवार गुट के पार्षद नाराज हो गए। इसी नाराजगी के चलते जोरगेवार समर्थक पार्षदों ने नामांकन वापस लेने का निर्णय लिया। परिणामस्वरूप जोन 2 से कांग्रेस की वैशाली चंदनखेडे निर्विरोध चुनी गईं, जबकि जोन 3 से कांग्रेस के रामनरेश यादव विजयी रहे। 

खास बात यह है कि जोन 3 में भाजपा के पास 13 के मुकाबले 10 का स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद उसे पीछे हटना पड़ा। इन घटनाओं ने चंद्रपुर मनपा में भाजपा की गुटबाजी को उजागर कर दिया है और आने वाले समय में इसके राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।