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Maharashtra

छठे राज्य वित्त आयोग की स्थापना को मंजूरी, 31 दिसंबर 2025 को रिपोर्ट सौंपेगी आयोग


मुंबई: मुंबई में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में छठे राज्य वित्त आयोग के गठन को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने की। यह आयोग 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक पांच वर्ष की अवधि के लिए सिफारिशें करेगा। आयोग को इन सिफारिशों पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक का समय मिलेगा।

बैठक में मुख्यमंत्री को आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के नामों की सिफारिश राज्यपाल को करने का अधिकार देने को भी मंजूरी दी गई। भारतीय प्रशासनिक सेवा के कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड अधिकारी या समकक्ष रैंक के अधिकारी को आयोग के सदस्य सचिव के पद पर नियुक्त किया जाएगा। बैठक में आयोग के कार्यकाल के दौरान आवश्यक पदों का सृजन करने, आयोग के कार्य को अधिक प्रभावी ढंग से चलाने के लिए आवश्यक कार्यालय तथा आवर्ती एवं अनावर्ती व्ययों के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान करने को मंजूरी दी गई। 

पंचायतों और नगर पालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा

संविधान के भाग IX और IX-A के अंतर्गत पंचायतों और नगर पालिकाओं के बीच वितरित किए जाने वाले शुद्ध राजस्व को राज्य द्वारा एकत्रित किए जाने वाले करों, शुल्कों, पथकरों और फीसों से विभाजित करना तथा ऐसे राजस्व का अपना-अपना हिस्सा पंचायतों और नगर पालिकाओं के सभी स्तरों को आवंटित करना। 

करों, शुल्कों, पथकरों और फीसों का निर्धारण करना जिन्हें पंचायतों या, जैसा भी मामला हो, नगर पालिकाओं को हस्तांतरित किया जाना हो, या जिन्हें पंचायतों या नगर पालिकाओं द्वारा, जैसा भी मामला हो, विनियोजित किया जाना हो।

राज्य की संचित निधि से पंचायतों या, जैसा भी मामला हो, नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले सहायता अनुदान को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों को अधिकथित करना। पंचायतों और नगर पालिकाओं की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए उपाय आवश्यक हैं।

आयोग को स्थानीय स्वशासन निकायों में निधि प्रबंधन के लिए अच्छे तरीकों को विकसित करना चाहिए। स्थानीय स्वशासन निकायों के बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए कुछ अन्य संबंधित मामलों पर सिफारिशें की जा सकती हैं। 

आयोग केन्द्रीय वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए सिफारिशें कर सकता है। इन विभिन्न मामलों पर सिफारिशें करते समय, कर हिस्सेदारी, शुल्क और सब्सिडी के निर्धारण का आधार जनसंख्या होगी। इसके लिए आयोग 2011 की जनगणना के जनसंख्या आंकड़ों पर विचार करेगा।