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Maharashtra

महाराष्ट्र विधानसभा: मानसून सत्र के तीसरे दिन किसानों के लिए बड़ा ऐलान, 30 जून तक 56 लाख किसानों की कर्जमाफी


मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन में किसानों के मुद्दों पर बड़ी घोषणाएं की गईं। नियम 293 के तहत कृषि क्षेत्र की समस्याओं पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने किसानों के हित में कई ऐतिहासिक और राहत देने वाले फैसले साझा किए।

कृषि मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा, "महायुति सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। आगामी 30 जून से पहले राज्य के 56 लाख से अधिक किसानों को करीब 36 हजार करोड़ रुपये की कर्जमाफी दे दी जाएगी।" उन्होंने साफ किया कि किसानों का सशक्तिकरण ही इस सरकार का मुख्य केंद्र बिंदु है।

मुख्य घोषणाएं और बड़े फैसले

56 लाख किसानों को ₹36,585 करोड़ की कर्जमाफी
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के वादे के अनुसार, संकट का सामना कर रहे किसानों का कर्ज माफ किया जा रहा है। प्राथमिक अनुमान के मुताबिक, राज्य के 56 लाख 24 हजार किसानों को कुल 36,585 करोड़ रुपये की कर्जमाफी दी जाएगी। कृषि मंत्री ने दावा किया कि यह कर्जमाफी साल 2009, 2017 और 2019 में लाई गई पिछली योजनाओं की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है।


'गोपीनाथ मुंडे किसान दुर्घटना योजना' का दायरा बढ़ा

इस महत्वपूर्ण योजना में सरकार ने दो बड़े बदलाव किए हैं:

  • खेत मजदूरों को शामिल किया गया: अब खेत में काम करने वाले दिहाड़ी और अन्य शेतमजूर (farm laborers) भी इस योजना का लाभ पा सकेंगे।
  • लू (Heatstroke) से मौत पर भी मदद: बढ़ते तापमान के कारण यदि किसी किसान की उष्माघात (Heatstroke) से मृत्यु होती है, तो उसके परिवार को भी इस योजना के तहत वित्तीय सहायता दी जाएगी, जो कि पहले लागू नहीं था।

'महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक'

संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) ने साल 2026 को 'अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष' घोषित किया है। इसी के मद्देनजर कृषि मंत्री ने ऐतिहासिक घोषणा की कि खेतों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाली महिलाओं को कृषि क्षेत्र में स्वतंत्र पहचान और उनके अधिकार दिलाने के लिए इसी सत्र में 'महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक' पेश किया जाएगा।

खादों की 'लिंकिंग' करने वाले दुकानदारों पर होगी सख्त कार्रवाई

खरीफ सीजन के लिए राज्य में 42 लाख मीट्रिक टन रासायनिक खाद और 28 लाख टन बीज उपलब्ध हैं। मंत्री ने चेतावनी दी कि सब्सिडी वाली खाद के साथ जबरन अन्य गैर-सब्सिडी वाले उत्पाद या कीटनाशक बेचने (लिंकिंग करने) वाले डीलरों पर सख्त कार्रवाई होगी। शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर: किसान अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए 1800 233 4000 या आधिकारिक व्हाट्सऐप नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा खाद वितरण में पारदर्शिता के लिए छत्रपति संभाजीनगर और कोल्हापुर में ऐप आधारित बुकिंग का पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा है।

कृषि समृद्धि योजना और फसल बीमा

  • कृषि समृद्धि योजना: जलवायु परिवर्तन से निपटने और बुनियादी ढांचे (खेत तालाब, मल्चिंग पेपर, ड्रोन, किसान सुविधा केंद्र) के विकास के लिए हर साल 5,000 करोड़ रुपये के प्रावधान वाली योजना शुरू की गई है, जिसमें से इस वर्ष के लिए 2,000 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं।
  • फसल बीमा (बीड पैटर्न): राज्य में 'बीड पैटर्न' (80-110 मॉडल) लागू होने से बीमा कंपनियों का मुनाफा 20% तक सीमित हो गया है। अब तक 96% पात्र किसानों को 1,523 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है।

"अभी बुआई की जल्दबाजी न करें किसान"

कृषि मंत्री भरणे ने किसानों से अपील की है कि हालांकि राज्य में बारिश शुरू हो गई है, लेकिन जब तक जमीन में अंदर तक पर्याप्त नमी (ओल) न बन जाए, तब तक किसान बुआई की जल्दबाजी न करें। सदन में विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री भावुक भी हुए। उन्होंने कहा, "यह किसानों की सरकार है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार खुद खेती-किसानी को अच्छी तरह समझते हैं। मैं स्वयं एक किसान हूं और आज भी जब तक अपने खेत में नहीं जाता, मुझे नींद नहीं आती। संकट में घिरे अपने अन्नदाता को बेसहारा छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता, उन्हें पूरी ताकत से दोबारा खड़ा करना ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है।"