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Chandrapur

धानोरकर-वडेट्टीवार संघर्ष में नया ट्विस्ट; अडूर को हाईकोर्ट से राहत, अडबाले की नियुक्ति पर रोक


- पवन झबाडे

चंद्रपुर: महानगरपालिका में कांग्रेस के गुट नेता पद को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। विभागीय आयुक्त ने 17 जून को जारी कीए आदेश के माध्यम से कांग्रेस गुटनेता पद पर सुरेंद्र अडबाले की नियुक्ति को मंजूरी दी थी। इस फैसले के खिलाफ तत्कालीन गुटनेता राजेश अडूर ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में याचिका दाखिल की थी।सोमवार को हुई सुनवाई में न्यायालय ने विभागीय आयुक्त के 17 जून के आदेश के अमल पर रोक लगा दी है और प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। इस फैसले से राजेश अडूर को फिलहाल राहत मिली है, वहीं सुरेंद्र अडबाले का गुटनेता बनने का रास्ता फिलहाल कानूनी पेंच में फंस गया है।न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज डी. वाकोडे की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। न्यायालय के इस आदेश से विभागीय आयुक्त के फैसले के बाद बने राजनीतिक समीकरणों पर फिलहाल विराम लग गया है।

क्या है पूरा मामला?

महानगरपालिका चुनाव के बाद कांग्रेस के 27 नगरसेवकों के गुट की आधिकारिक रूप से नोंदणी की गई थी। उस समय राजेश अडूर को सर्वसम्मति से गुटनेता चुना गया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से सांसद प्रतिभा धानोरकर और विधायक विजय वडेट्टीवार समर्थक नगरसेवकों के बीच राजनीतिक खींचतान बढ़ गई थी। इसी पृष्ठभूमि में धानोरकर समर्थक 16 नगरसेवकों ने राजेश अडूर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सुरेंद्र अडबाले को गुटनेता चुने जाने का दावा किया। इसके बाद गुटनेता पद की नोंद में बदलाव की मांग विभागीय आयुक्त के पास की गई। विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने 17 जून को राजेश अडूर की गुटनेता पद की नोंद रद्द करते हुए सुरेंद्र अडबाले को नए गुटनेता के रूप में मान्यता दी थी।

हाईकोर्ट में क्या हुआ?

विभागीय आयुक्त के फैसले को चुनौती देते हुए राजेश अडूर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि विभागीय आयुक्त का आदेश कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। इसके बाद न्यायालय ने प्राथमिक सुनवाई में ही 17 जून के आदेश के अमल पर रोक लगा दी। अब विभागीय आयुक्त द्वारा किए गए गुटनेता पद के बदलाव की नोंद फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगी। मामले पर अंतिम फैसला अगली सुनवाई के बाद होगा।

राजनीतिक असर पर नजर

कांग्रेस के धानोरकर-वडेट्टीवार गुट के बीच चल रहे संघर्ष से चंद्रपुर महानगरपालिका की राजनीति गरमा गई है। विभागीय आयुक्त के फैसले को धानोरकर गुट की बड़ी जीत माना जा रहा था, लेकिन हाईकोर्ट की रोक के बाद राजेश अडूर को बड़ा दिलासा मिला है। अब 6 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर कांग्रेस सहित चंद्रपुर महानगरपालिका की राजनीति की निगाहें टिकी हुई हैं।