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Maharashtra

बगावत के बाद सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर की पहली प्रतिक्रिया, बोले- उद्धव ठाकरे से कोई नाराजगी नहीं, विकास के लिए लिया फैसला


मुंबई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के छह सांसदों की बगावत के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच बागी सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। पिछले दो-तीन दिनों से जारी राजनीतिक अटकलों पर विराम लगाते हुए उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वे पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से बिल्कुल भी नाराज नहीं हैं और सत्ता पक्ष के साथ जाने का निर्णय केवल अपने लोकसभा क्षेत्र के विकास और पर्याप्त निधि (फंड) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

नागेश पाटिल आष्टीकर ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनके बारे में विभिन्न तरह की चर्चाएं चल रही थीं, इसलिए उन्होंने जनता के सामने अपनी बात रखना जरूरी समझा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका कदम किसी व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम नहीं है। उन्होंने कहा, “उद्धव साहेब ने मुझे हमेशा स्नेह और सम्मान दिया है। मैं उनसे बिल्कुल भी नाराज नहीं हूं। संजय राऊत या अन्य वरिष्ठ नेता मेरे बारे में कुछ भी कहें, यह उनका अधिकार है। उन्होंने भी हमेशा मुझ पर प्यार बरसाया है और मैं उनका सम्मान करता हूं।”

18 जून के बाद बदला राजनीतिक घटनाक्रम
बगावत के समय को लेकर स्पष्टीकरण देते हुए आष्टीकर ने कहा कि 18 जून तक उनके समूह का कोई भी सांसद कहीं नहीं गया था। हालांकि इसके बाद पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा जिस प्रकार की बयानबाजी की गई, उससे कई सांसदों को यह महसूस हुआ कि अब वहां रहकर कोई लाभ नहीं है। इसी कारण उन्होंने नया राजनीतिक कदम उठाने का निर्णय लिया।

केवल 5 करोड़ के फंड से विकास संभव नहीं
अपने निर्णय का बचाव करते हुए सांसद आष्टीकर ने कहा कि सत्ता से दूर रहकर जनता और कार्यकर्ताओं के विकास कार्य पूरे करना बेहद कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने उन्हें बड़ी उम्मीदों के साथ चुनकर संसद भेजा है और उनकी अपेक्षाओं को पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, “हमारे क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध नहीं हो रही थी। सांसद निधि के रूप में मिलने वाले केवल 5 करोड़ रुपये से गांव-गांव की विकास आवश्यकताओं को पूरा करना संभव नहीं है। हर गांव में लोगों की अलग-अलग मांगें और अपेक्षाएं हैं। यदि विकास के लिए पर्याप्त फंड ही नहीं होगा तो जनता के काम कैसे किए जाएंगे?”

विकास के लिए सत्ता में जाना जरूरी 
नागेश पाटिल आष्टीकर ने कहा कि उनके इस फैसले से कुछ लोग सहमत होंगे और कुछ असहमत, लेकिन अंतिम निर्णय जनता ही करेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने जनता से वादा किया था कि वे उनके सेवक बनकर काम करेंगे और उसी वादे को निभाने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है।

उन्होंने कहा, “पिछले दो वर्षों से मैं पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम कर रहा हूं और आगे भी करता रहूंगा। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण मेरे मतदाताओं का विकास और उनके क्षेत्र में अधिक से अधिक निधि लाना है। इसी उद्देश्य से सत्ता के साथ जाना मेरे लिए आवश्यक हो गया था। जनता ने जो जिम्मेदारी मुझे सौंपी है, उसे मैं पूरी निष्ठा के साथ निभाऊंगा।”