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Nagpur: बजाजनगर के अवैध रेस्टोरेंट्स पर चलेगा बुलडोजर! हाईकोर्ट की फटकार के बाद फडणवीस सरकार ने खारिज की अपील


नागपुर: नागपुर के वीआईपी इलाके बजाजनगर में चल रहे अवैध रेस्टोरेंट्स पर अब किसी भी वक्त प्रशासन का बुलडोजर चल सकता है। राज्य सरकार के नगर विकास विभाग (UDD) के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी असीम गुप्ता ने रेस्टोरेंट मालिकों द्वारा दाखिल की गई अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है। दरअसल, यह पूरी ज़मीन सरकारी है जिसे एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी को लीज़ पर दिया गया था और इसका कुछ हिस्सा अन्य महत्वपूर्ण कामों के लिए रिज़र्व भी है। नियमों की धज्जियां उड़ाकर बनाई गई इन कमर्शियल इमारतों के खिलाफ नगर निगम ने साल 2016 में एक्शन नोटिस जारी किया था, जिसे अब सरकार ने हरी झंडी दे दी है।

रातभर अवैध गतिविधियां और लॉ एंड ऑर्डर की गंभीर समस्या
शंकरनगर से बजाजनगर के इस पूरे बेल्ट में चल रहे इन होटलों और रेस्टोरेंट्स की वजह से स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल हो चुका है। इलाके में रात-रात भर चलने वाली संदिग्ध और गैर-कानूनी गतिविधियों के कारण कानून-व्यवस्था (Law & Order) की गंभीर स्थिति पैदा हो रही है। इसी परेशानी को देखते हुए डॉ. ललित हारोड़े, असीम बोर्डिया और मृदुला फड़के ने हाई कोर्ट में एक क्रिमिनल पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दाखिल की थी। इस जनहित याचिका पर बुधवार को जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोड़े की डिवीज़न बेंच के सामने विस्तार से सुनवाई हुई।

10 सालों में 27 से बढ़कर 53 हुए अवैध रेस्टोरेंट
इस पूरे मामले में प्रशासन और सरकार की ढीली कार्यप्रणाली भी उजागर हुई है। नागपुर महानगर पालिका (NMC) ने साल 2016 में ही MRTP एक्ट के सेक्शन 53 के तहत यहाँ के 27 रेस्टोरेंट्स को नोटिस थमाए थे, लेकिन तब राज्य सरकार ने राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में आकर इस कार्रवाई पर स्टे लगा दिया था। जब यह मामला हाई कोर्ट के संज्ञान में आया, तो कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई जिसके बाद आनंद-फानन में रेस्टोरेंट मालिकों की अपीलें खारिज की गईं। इस बीच चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पिछले 10 सालों में कार्रवाई न होने का फायदा उठाकर यहाँ अवैध रेस्टोरेंट्स की संख्या 27 से बढ़कर सीधे 53 हो चुकी है।

कोर्ट रूम में वकीलों की फौज और रेस्टोरेंट मालिकों का दबाव का आरोप
बुधवार को हुई इस हाई-प्रोफाइल सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में दोनों पक्षों की ओर से वकीलों की बड़ी फौज मैदान में उतरी। राज्य सरकार का पक्ष एडवोकेट संगीता जाचक ने रखा, जबकि नागपुर नगर निगम की तरफ से एडवोकेट जेमिनी कासट ने पैरवी की। अदालत की सहायता के लिए एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) के तौर पर एडवोकेट पार्थ मालवीय ने बहस की। दूसरी तरफ, रेस्टोरेंट मालिकों की ओर से एडवोकेट फिरदौस मिर्जा और एडवोकेट उदय डबली ने कोर्ट में मोर्चा संभाला और आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसी बाहरी दबाव में आकर उनके खिलाफ यह एकतरफा कार्रवाई करने पर आमादा है।

मध्यस्थता की गुहार और मनपा का 15 दिनों का अल्टीमेटम
कार्रवाई के डर से घबराए रेस्टोरेंट मालिकों ने कोर्ट से मीडिएशन (मध्यस्थता) एप्लीकेशन फाइल करने की इजाज़त मांगी है। उन्होंने अदालत से रिक्वेस्ट की कि नगर निगम को उनका पक्ष सुने बिना कोई भी दंडात्मक या तोड़फोड़ की कार्रवाई करने से रोका जाए। हाई कोर्ट ने फिलहाल उन्हें मध्यस्थता का आवेदन देने की मंजूरी देते हुए मामले की अगली सुनवाई को टाल दिया है। हालांकि, नगर निगम ने भी अपनी स्थिति साफ करते हुए कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि वह तुरंत कोई बुलडोजर नहीं चलाएगा, बल्कि नियमों के तहत किसी भी एक्शन से पहले सभी संबंधित दुकानदारों को 15 दिनों का लिखित नोटिस (अल्टीमेटम) दिया जाएगा।