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Gen-Z को नए सिरे से साधेगी भाजपा; स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े की सदस्यता वाली समिति का किया गठन; मुद्दे समझना और पार्टी की विचारधारा से जोड़ना मुख्या मकसद


नई दिल्ली: NEET पेपर लीक विवाद और देशभर में युवाओं के आंदोलनों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने Gen Z के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नई रणनीति पर काम शुरू किया है। इसके तहत भाजपा ने युवाओं से संवाद और संपर्क बढ़ाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके लिए स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े और हर्ष सांघवी समेत प्रमुख नेताओं की समिति गठित की गई है। इस अभियान से मध्य से भाजपा युवाओं के मुद्दों को समझना, उनसे संवाद बढ़ाना और पार्टी की विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में हुए छात्र आंदोलनों के बाद भाजपा अब युवाओं के बीच अपनी रणनीति को नए सिरे से मजबूत करने में जुट गई है। पार्टी का फोकस खास तौर पर Gen Z यानी नई पीढ़ी के युवाओं पर है, जो सोशल मीडिया के साथ-साथ रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, अवसरों और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। इसी दिशा में भाजपा ने Gen Z के साथ संपर्क और संवाद बढ़ाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इसके लिए पार्टी ने एक समिति का गठन किया है, जिसमें महासचिव स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, ओपी चौधरी और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी सहित कई प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है।

समिति की जिम्मेदारी युवाओं के बीच जाकर उनके मुद्दों और विचारों को समझना, उनसे सीधे संवाद स्थापित करना और पार्टी की नीतियों व विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगी। शनिवार को नितिन नबीन की नई टीम घोसित होने के बाद भाजपा मुख्यालय में पहली बैठक हुई। बैठक में सभी नव नियुक्त पदाधिकारियों का एक दूसरे से परिचय कराया गया। इसी दौरान भाजपा अध्यक्ष ने युवाओं से अन्य सिरे से संपर्क अभियान शुरू करने और भाजपा विचारधारा को उनके तक पहुंचाने का निर्देश दिया। 

इस अभियान के माध्यम से भाजपा की कोशिश सिर्फ पारंपरिक राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित रहने की नहीं है, बल्कि युवाओं के बीच सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म, संवाद कार्यक्रमों और नए माध्यमों के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत करने की है। पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि Gen Z किस तरह के मुद्दों को प्राथमिकता देता है और राजनीति से उसकी क्या अपेक्षाएं हैं।

NEET विवाद के बाद युवाओं के बीच परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर बढ़ी नाराजगी ने राजनीतिक दलों के लिए नई चुनौती खड़ी की है। ऐसे में भाजपा का यह नया अभियान युवाओं के साथ दूरी कम करने और नई पीढ़ी के बीच संगठनात्मक एवं वैचारिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

अब समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवाओं के साथ महज राजनीतिक संवाद स्थापित करना नहीं, बल्कि उनके सवालों और असंतोष को समझते हुए उन्हें पार्टी के साथ जोड़ने की होगी। आने वाले दिनों में Gen Z को लेकर भाजपा की यह नई रणनीति किस तरह जमीन पर उतरती है और युवाओं के बीच इसका कितना असर होता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।