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Chandrapur

Chandrapur: मनपा में नौकरी का झांसा देकर 83 बेरोजगारों से 38 लाख की ठगी


चंद्रपुर: महानगरपालिका और वस्तु एवं सेवा कर (GST) कार्यालय में ठेके पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगों ने 83 से अधिक शिक्षित बेरोजगारों से 38 लाख 3 हजार रुपये की ठगी किए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले में रामनगर पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत उसके साथी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जितेंद्र सारसर और मंगला संभा वानखेडे के रूप में हुई है।

खास बात यह है कि इस ठगी का मुख्य सूत्रधार जितेंद्र सारसर चंद्रपुर महानगर पालिका में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत है। वह बेरोजगारों के सामने खुद को मनपा का बड़ा अधिकारी बताते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से अच्छे संबंध होने का दावा करता था। महज ढाई लाख रुपये में मनपा और GST विभाग में ठेका पद्धति पर नौकरी लगवाने का झांसा देकर वह युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। बेरोजगारों का विश्वास जीतने के लिए वह उनके सामने किसी व्यक्ति को फोन कर नौकरी के संबंध में बातचीत करने का नाटक भी करता था।

इस पूरे फर्जीवाड़े में मंगला वानखेडे भी उसका साथ देती थी। पैसे देने के बावजूद नौकरी नहीं मिलने पर पीड़ित बेरोजगारों को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने रामनगर पुलिस थाने पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4), 319(2), 351(3) और 3(5) के तहत धोखाधड़ी और धमकी का मामला दर्ज किया है।

पुलिस निरीक्षक प्रभावती एकुरके के मार्गदर्शन में पुलिस ने तत्काल जांच शुरू करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस पूरे रैकेट में और कितने लोग शामिल हैं तथा ठगी की कुल रकम कितनी है, इसकी जांच पुलिस कर रही है।

ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

लाखों रुपये देने के बावजूद कई महीने बीत जाने पर भी नौकरी का नियुक्ति पत्र नहीं मिलने से कुछ बेरोजगारों को संदेह हुआ। उन्होंने सीधे महानगरपालिका कार्यालय पहुंचकर नौकरी के संबंध में पूछताछ की। वहां पता चला कि बेरोजगारों को नौकरी का सपना दिखाने वाला जितेंद्र कोई अधिकारी नहीं, बल्कि महानगरपालिका में कार्यरत सफाई कर्मचारी है। यह जानकारी सामने आते ही पीड़ितों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

पैसे वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी

ठगी का पता चलने के बाद शिकायतकर्ता सोनी ठाकरे समेत अन्य पीड़ितों ने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए। आरोप है कि मुख्य आरोपी जितेंद्र ने उन्हें सीधे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़ित मंगला वानखेडे के घर पहुंचे। वहां उसके पति ने भी पीड़ितों के साथ गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और उन्हें वहां से भगा दिया।