मनोज जरांगे के आंदोलन से OBC आरक्षण को कोई खतरा नहीं: परिणय फुके
नागपुर: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन के बीच भाजपा नेता और पूर्व मंत्री परिणय फुके ने बड़ा बयान दिया है। नागपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में फुके ने दावा किया कि जरांगे के आंदोलन से ओबीसी आरक्षण को किसी तरह का खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि आरक्षण आंदोलन के दबाव पर नहीं, बल्कि संविधान और कानून के दायरे में दिया जाता है।
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए परिणय फुके ने मनोज जरांगे पाटील की भूमिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार को धमकी देने या राज्य को दबाव में लेने की भाषा उचित नहीं है। फुके ने दावा किया कि जरांगे को संविधान और आरक्षण की कानूनी प्रक्रिया का अध्ययन करने की जरूरत है और उनके सलाहकार उन्हें गलत सलाह दे रहे हैं।
संविधान और कानून के दायरे में ही मिलेगा आरक्षण
परिणय फुके ने कहा कि देश में आरक्षण देने की प्रक्रिया संविधान और संबंधित कानूनों के तहत होती है। किसी आंदोलन के दबाव या जोर-जबरदस्ती के आधार पर सरकार किसी समाज को आरक्षण नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि आरक्षण की लड़ाई सड़क पर नहीं, बल्कि कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए लड़ी जानी चाहिए।
फुके ने कहा कि जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करते समय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाता है। इसलिए मराठा आरक्षण के मुद्दे पर अच्छे वकीलों के माध्यम से अदालत में उचित तरीके से अपनी बात रखी जानी चाहिए।
58 लाख कुणबी रिकॉर्ड का दावा भी उठाया सवाल
मनोज जरांगे पाटील की ओर से बार-बार किए जा रहे 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड के दावे पर भी परिणय फुके ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इन रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा पहले से मौजूद रिकॉर्ड का है और इनके आधार पर कई लोगों को पहले ही कुणबी या ओबीसी वर्ग के प्रमाणपत्र मिल चुके हैं।
फुके ने कहा कि 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड मिलने का मतलब यह नहीं है कि 58 लाख नए लोगों को ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलेगा। पात्र लोगों को कानून के मुताबिक प्रमाणपत्र दिया जा सकता है, लेकिन इससे मौजूदा ओबीसी आरक्षण पर कोई खतरा नहीं आएगा।
‘ओबीसी आरक्षण कहीं भी खतरे में नहीं’
परिणय फुके ने स्पष्ट तौर पर कहा कि ओबीसी आरक्षण कहीं भी खतरे में नहीं है। उनके मुताबिक किसी भी जाति को मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में शामिल करने के लिए एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया है। केवल आंदोलन, राजनीतिक दबाव या मांग के आधार पर किसी समाज को आरक्षण सूची में शामिल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति के पास कुणबी होने का वैध और कानूनी प्रमाण है, तो उसे प्रमाणपत्र मिलने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हालांकि, पूरी प्रक्रिया संविधान, कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही होनी चाहिए।
मराठा समाज को कुणबी रिकॉर्ड के आधार पर ओबीसी आरक्षण का लाभ देने की मांग और मौजूदा ओबीसी आरक्षण को सुरक्षित रखने की मांग के बीच यह मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
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