"मासूमों की जान की कोई कीमत नहीं?", गड़चिरोली कांड के बाद नासिक के आश्रम स्कूल का वीडियो शेयर कर वडेट्टीवार ने सरकार को घेरा
नागपुर/नाशिक: महाराष्ट्र के गड़चिरोली स्थित जपतलाई आश्रम स्कूल में जहरीले सांप के काटने से तीन मासूम छात्राओं की दर्दनाक मौत के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। अब नासिक जिले के सुरगाणा तालुका स्थित पलसन सरकारी आश्रम स्कूल की बदहाली का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। इस वीडियो को कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने साझा करते हुए सरकार और प्रशासन पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि "मासूम बच्चियों की जान जाने के बाद भी यह निर्दयी सरकार और सुस्त प्रशासन होश में नहीं आया है।"
पलसन आश्रम स्कूल की बदहाली
गड़चिरोली की घटना के पीछे बिस्तरों की कमी मुख्य वजह थी। इसके बावजूद पलसन के आश्रम स्कूल में खाट और बिस्तरों के अभाव में करीब ४४० छात्र-छात्राएं कड़ाके की ठंड और जहरीले जीवों के खतरे के बीच जमीन पर सोने को मजबूर हैं। आश्रम स्कूल में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते छात्रों को रात के अंधेरे में खुले में कपड़े धोने पड़ते हैं। वन्यजीवों और सापों की मौजूदगी वाले इस इलाके में यह लापरवाही बच्चों की जान पर भारी पड़ सकती है।
विजय वडेट्टीवार ने सवाल उठाते हुए कहा, "क्या सरकार के लिए आदिवासी बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं है? अगर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं, तो सरकार का करोड़ों का फंड कहां जा रहा है? गरीबों के बच्चों के नाम पर भ्रष्टाचार बंद होना चाहिए।"
गड़चिरोली घटना की पृष्ठभूमि
१० अगस्त की आधी रात गड़चिरोली के धानोरा तालुका स्थित जपतलाई अनुदानित आश्रम स्कूल में करैत सांप के काटने से दीपिका लकड़ा, सुष्मिता मंडल और अनु कोरेटी नाम की तीन छात्राओं की मौत हो गई थी। बिस्तरों की कमी के चलते ये छात्राएं फर्श पर सो रही थीं।
इस भयावह घटना का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। वहीं स्कूल के हेडमास्टर और अधीक्षक पर एफआईआर दर्ज की गई है, स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश को 'अधिसूचित बीमारी' घोषित किया है और राज्य सरकार ने सभी आश्रम स्कूलों के तीन महीने में 'थर्ड पार्टी ऑडिट' कराने के निर्देश दिए हैं।
सिर्फ कागजी नहीं, जमीनी ऑडिट की जरूरत
पलसन आश्रम स्कूल के हालात को देखते हुए मांग उठ रही है कि महज कागजी जांच के बजाय अधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर व्यवस्थाओं की जांच करें। आश्रम स्कूलों में निम्नलिखित बुनियादी सुविधाओं की तुरंत समीक्षा जरूरी है:
- प्रत्येक छात्र के लिए स्वतंत्र खाट और बिस्तर की व्यवस्था
- छात्राओं के लिए सुरक्षित और अलग शौचालय
- चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति और रात में पर्याप्त रोशनी
- आपात स्थिति के लिए तुरंत मेडिकल सहायता और एम्बुलेंस की सुविधा
विजय वडेट्टीवार ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। आदिवासी और गरीब बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा आश्रम स्कूलों की व्यवस्था दुरुस्त करना वर्तमान में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
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