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Nagpur

Student Strike: सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बनी सहमति, 10 दिनों से शुरू आंदोलन आखिर हुआ समाप्त


नागपुर: उपराजधानी नागपुर में विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 10 दिनों से जारी आदिवासी छात्रों का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया। शनिवार को आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके आंदोलन स्थल पर पहुंचे, जहां मंत्री और आंदोलनकारी छात्रों के बीच हुई बैठक में मांगों को लेकर सहमति बनी। इसके बाद छात्रों ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी।

ज्ञात हो कि राज्य सरकार ने आदिवासी छात्रों के लिए संचालित वसतिगृहों में प्रवेश को लेकर नया जीआर जारी किया था। इसमें 30 वर्ष से अधिक उम्र के छात्रों के हॉस्टल में प्रवेश पर रोक का प्रावधान किया गया था। सरकार के इस फैसले के विरोध में छात्र आक्रोशित हो गए और 13 अगस्त से उपराजधानी नागपुर के गिरीपेठ स्थित अपर आदिवासी आयुक्त कार्यालय के बाहर आंदोलन शुरू कर दिया।

छात्रों की मांग थी कि सरकार इस जीआर को रद्द करे और उनकी लंबित मांगों को पूरा किया जाए। पिछले दस दिनों के दौरान मुंबई से लेकर नागपुर तक सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं। इनमें अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई, लेकिन हॉस्टल में प्रवेश की उम्र सीमा को लेकर पेच बरकरार रहा।

एक तरफ छात्र अपनी मांग पर अड़े हुए थे, तो दूसरी तरफ सरकार का कहना था कि केवल जायज मांगों को ही स्वीकार किया जाएगा। इसी बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश लगातार जारी रही। शुक्रवार को नागपुर के रवि भवन में आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक हुई। बैठक सकारात्मक रही और पहली बार दोनों पक्षों के बीच सहमति का रास्ता साफ हुआ।

इसके बाद शनिवार को मंत्री अशोक उइके खुद आंदोलन स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत की। सरकार की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर छात्रों ने सहमति जताई और इसके बाद आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी।

आंदोलन समाप्त होने के बाद आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र उनके अपने छात्र हैं और सरकार उनकी अभिभावक है। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी छात्रों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उनके हितों से जुड़े मुद्दों का समाधान करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।