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Wardha

"हम शिक्षक हैं, व्यापारी नहीं!" तुकाराम मुंढे के आदेश पर भड़के शिक्षक, मिड-डे मील के FSSAI लाइसेंस को लेकर छिड़ा नया विवाद


नागपुर/वर्धा: महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे के एक नए आदेश ने राज्यभर के शिक्षकों और प्राचार्यों (मुख्याध्यापकों) में भारी रोष पैदा कर दिया है। तुकाराम मुंढे द्वारा स्कूलों में 'शालेय पोषण आहार' (मिड-डे मील) योजना के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का लाइसेंस/पंजीकरण लेना अनिवार्य किए जाने के फैसले का शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।

शिक्षक संगठनों का कहना है, "हमारा काम बच्चों को पढ़ाना और उन्हें भोजन उपलब्ध कराना है। इसके लिए FSSAI का लाइसेंस लेने के लिए कहना हमें शिक्षक से दुकानदार या व्यापारी बनाने जैसा है, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।"

विवाद की मुख्य वजहें और शिक्षकों की आपत्तियां:
मुख्याध्यापक बन जाएंगे 'फूड बिजनेस ऑपरेटर' (FBO)
FSSAI कानून के तहत यदि स्कूल के नाम पर लाइसेंस लिया जाता है, तो मुख्याध्यापक कानूनी तौर पर 'फूड बिजनेस ऑपरेटर' बन जाएंगे। इसका मतलब यह होगा कि भोजन पकाने से लेकर वितरण तक की पूरी कानूनी जिम्मेदारी सीधे स्कूल प्रमुख पर आ जाएगी।

सीधे हेडमास्टर पर होगी कानूनी और पुलिस कार्रवाई
FSSAI एक्ट की धारा 66 के अनुसार, संस्था में गड़बड़ी होने पर उसके प्रभारी पर कार्रवाई होती है। यदि मिड-डे मील में फूड पॉइजनिंग या घटिया गुणवत्ता का मामला सामने आता है, तो पुलिस और खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) सीधे मुख्याध्यापक के खिलाफ FIR दर्ज कर सकते हैं।

लाखों का जुर्माना और जेल की लटकती तलवार
FSSAI कानून में कड़े दंड के प्रावधान हैं:

  • धारा 51 (घटिया गुणवत्ता का भोजन): ₹5 लाख तक का जुर्माना।
  • धारा 52 (गुमराह करने वाली जानकारी): ₹3 लाख तक का जुर्माना।
  • धारा 59 (असुरक्षित भोजन/बीमारी या अनहोनी): ₹1 लाख से लेकर ₹10 लाख तक का जुर्माना और 6 महीने से लेकर उम्रकैद तक की सजा।
  • शिक्षकों का कहना है कि उनका वेतन इस जुर्माने की रकम से बहुत कम है और ऐसे नियम शिक्षकों को आर्थिक व मानसिक रूप से बर्बाद कर देंगे।

ठेकेदारों की लापरवाही की सजा भुगतेंगे शिक्षक
शिक्षकों का आरोप है कि सरकारी गोदामों या ठेकेदारों से कई बार खराब व फंगस लगा अनाज भेजा जाता है। ऐसे में यदि लैब टेस्ट में अनाज फेल होता है, तो ठेकेदार पल्ला झाड़ लेगा और FBO होने के नाते मुख्याध्यापक पर लाखों का जुर्माना थोप दिया जाएगा।

शिक्षक और मुख्याध्यापक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे किसी भी सूरत में FSSAI का लाइसेंस नहीं लेंगे और यदि यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो राज्यभर में तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।