बर्थ सर्टिफिकेट घोटाले में नया खुलासा: किरीट सोमैया का दावा, अमरावती में भी कमिश्नर ने दिए 15 दिनों में जांच के आदेश
अमरावती: भाजपा के फायरब्रांड नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने आज अमरावती का दौरा कर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। अमरावती महानगरपालिका (मनपा) के कमिश्नर से मुलाकात के बाद सोमैया ने 'जन्म प्रमाणपत्र (Birth Certificate) घोटाले' को लेकर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने साफ कहा कि मुंबई और नागपुर के बाद अब अमरावती में भी इस महाघोटाले के तार जुड़ रहे हैं।
'करेक्शन' के नाम पर चल रहा है अवैध खेल: सोमैया
मीडिया से बात करते हुए किरीट सोमैया ने इस घोटाले के काम करने के तरीके (Modus Operandi) को उजागर किया। उन्होंने कहा, "तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 3 लाख फर्जी जन्म प्रमाणपत्र रद्द किए गए थे। लेकिन अब उसी पुराने डेटा में "सुधार" (Correction) के नाम पर नए जन्म प्रमाणपत्र धड़ल्ले से बांटे जा रहे हैं, जबकि पुराने फर्जी रिकॉर्ड्स को भी सिस्टम में कायम रखा गया है। नाम बदलकर दूसरा प्रमाणपत्र जारी करना पूरी तरह से गैरकानूनी है और यह एक सुनियोजित तरीके से किया जा रहा बहुत बड़ा घोटाला है।
मुंबई में 87 हजार फर्जी सर्टिफिकेट, SIT कर रही जांच
सोमैया ने इस घोटाले की भयावहता का आंकड़ा देते हुए बताया कि सिर्फ मुंबई में इस तरह के करीब 87 हजार संदिग्ध प्रमाणपत्र बांटे गए हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस की एसआईटी (SIT) फिलहाल जांच कर रही है। इसके अलावा कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका और लोनावला में भी इसके लिए विशेष जांच समितियां गठित की जा चुकी हैं।
नागपुर के बाद अब अमरावती में एक्शन, मनपा कमिश्नर ने मांगा समय
किरीट सोमैया ने जानकारी दी कि नागपुर में भी मनपा कमिश्नर ने इस घोटाले की जांच के लिए कमेटी बना दी है। वहीं, आज अमरावती में उनके द्वारा सबूत सौंपे जाने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। किरीट सोमैया ने कहा, "अमरावती मनपा कमिश्नर ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने इस घोटाले की तह तक जाने और विस्तृत जांच के लिए मुझसे 15 दिनों का समय मांगा है। जल्द ही यहां भी आधिकारिक तौर पर जांच प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।"
इस खुलासे के बाद अमरावती प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस जांच में अमरावती से भी फर्जी सर्टिफिकेट के आंकड़े सामने आते हैं, तो कई बड़े अधिकारियों और दलालों पर गाज गिरना तय है।
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