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Maharashtra

23 साल बाद राजनीतिक मंच पर एक साथ पहुंचे राज और उद्धव, भविष्य में एक साथ रहने की घोषणा


मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति और ठाकरे परिवार के लिए शनिवार पांच जुलाई का दिन बेहद अहम रहा। राजनीति में दो ध्रुव माने जाने वाले राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने अपने तमाम गीले शिकवे मिटाते हुए 23 साल बाद एक साथ राजनीतिक मंच साझा किया। दोनो नेता न केवल एक साथ मंच पर पहुंचे बल्कि दोनों ने एक दूसरे का हाथ पकड़कर भविष्य में एक साथ रहने की घोषणा भी की। 

दरअसल, शनिवार को मुंबई के वर्ली स्थित एएससीआई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने संयुक्त मराठी विजय महारैली का आयोजन किया। जहां दोनो ठाकरे एक साथ मंच पर पहुंचे। इस दौरान दोनों नेताओं ने राज्य सरकार द्वारा त्री भाषा फॉर्मूले पर हिंदी की सख्ती को वापस लेने के फैसले को खुद की जीत बताई। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर हमला बोला। इसी के साथ दोनों नेताओं ने भविष्य में एक साथ रहने की घोषणा भी की।

जो बालासाहेब न कर पाएं, फडणवीस ने किया

इस दौरान बोलते हुए राज ठाकरे ने कहा कि, "मैंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरा महाराष्ट्र किसी भी राजनीति और लड़ाई से बड़ा है। आज 20 साल बाद मैं और उद्धव एक साथ आए हैं। जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया, हम दोनों को साथ लाने का काम।"

हम भविष्य में भी रहेगें साथ 

उद्धव ठाकरे ने कहा कि, "जब भाजपा कहती है कि उन्हें एक संविधान, एक निशान और एक प्रधानमंत्री चाहिए, तो उन्हें याद रखना चाहिए कि एक निशान तिरंगा है, न कि भाजपा का झंडा, जो बर्तन साफ ​​करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कपड़े का एक टुकड़ा मात्र है।"

ठाकरे ने कहा, "वे हमसे हमेशा पूछते हैं कि हमने BMC में अपने शासन के दौरान मुंबई में मराठी लोगों के लिए क्या किया। अब हम सवाल पूछ रहे हैं,आपके शासन के पिछले 11 वर्षों में, आपने क्या किया है? आपने मुंबई के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को गुजरात में धकेल दिया है। व्यवसाय गुजरात में स्थानांतरित हो रहे हैं। बड़े कार्यालय गुजरात जा रहे हैं। हीरा व्यवसाय पहले ही गुजरात में स्थानांतरित हो चुका है, आपने महाराष्ट्र की रीढ़ तोड़ने के लिए सभी प्रयास किए हैं और ऐसा करना जारी रखा है, और आप हमसे सवाल पूछ रहे हैं?" इसी के साथ उद्धव ने यह भी कहा कि, हम दोनो साथ आएं हैं केवल मराठी के लिए नहीं बल्कि हम हमेशा साथ रहेंगे।"