logo_banner
Breaking
  • ⁕ SAI का भव्य खेल संकुल गया वापस, मनपा वापस लेगी 90 एकड़ आवंटित भूमि; निजी संस्था 500 करोड़ खर्च कर विकसित करेगी सुविधाएं ⁕
  • ⁕ किसानों को बड़ी राहत, 24 से 27 सिंतबर के दरमियान विदर्भ में जमकर बरसेंगे बादल ⁕
  • ⁕ Buldhana: सूखे पर महायुति में विवाद! दिलीपकुमार सानंदा ने सरकार के रवैये पर उठाए सवाल, बोले- “अजितदादा होते तो कभी का घोषित हो गया होता” ⁕
  • ⁕ बुलढाणा में कांग्रेस को बड़ा झटका, पूर्व विधायक राहुल बोंद्रे ने भाजपा में जाने का किया ऐलान ⁕
  • ⁕ Nagpur: तेज रफ़्तार एसटी ने दोपहिया को मारी टक्कर, बुजुर्ग की मौत ⁕
  • ⁕ श्वेता महल्ले और संजय गायकवाड़ के बीच जुबानी जंग तेज; भाजपा विधायक के बाप वाले जश्न पर शिवसेना नेता का पलटवार, कहा- समय पर बताऊंगा कौन है असली बाप? ⁕
  • ⁕ Nagpur: मल्टीलेयर साउंड सिस्टम, प्लाज्मा और प्रेशर मिड पर रोक; पुलिस आयुक्त की 60 दिन की अधिसूचना ⁕
  • ⁕ Nagpur: डांस क्लास जाने की बात पर पति-पत्नी में हुआ विवाद, दो बच्चों के सामने पति ने पत्नी के गले और पेट पर किए वार ⁕
  • ⁕ Nagpur: शराब को लेकर पति-पत्नी में हुआ विवाद, महिला की जान गई; पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ Nagpur: 8 साल की बच्ची से कोच ने की छेड़खानी, पुलिस ने आरोपी कोच को किया गिरफ्तार ⁕
Nagpur

धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है: सरसंघचालक मोहन भागवत


नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा, "धर्म केवल ईश्वर की पूजा नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए है। धर्म का कार्य समाज के लिए पवित्र है। जो समाज धर्म के मार्ग पर चलता है, वहाँ कलह नहीं, शांति होती है।" भागवत नागपुर में 'धर्म जागरण न्यास' के प्रांतीय कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने धर्म, कर्तव्य, एकता और मानवता के मूल्य पर गहन विचार प्रस्तुत किए। अपने भाषण में उन्होंने हिंदू धर्म की वैश्विक भूमिका, भारतीय परंपरा की विशेषताओं और आज विश्व के सामने मौजूद संघर्षों की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला।

भागवत ने कहा, "धर्म केवल ईश्वर के लिए नहीं, बल्कि मानवता के लिए है। समाज को एक सूत्र में पिरोने वाला सिद्धांत धर्म है। जैसे गुरुत्वाकर्षण है, वैसे ही धर्म भी है - चाहे हम इसे स्वीकार करें या न करें, यह विद्यमान रहता है। जो धर्म का पालन करता है, वह संकट से बच जाता है, लेकिन जो इसका उल्लंघन करता है, वह संकट में पड़ जाता है।" उन्होंने आगे कहा कि धर्म केवल धार्मिक पूजा, अनुष्ठान या उपासना नहीं, बल्कि एक कर्तव्य है। भागवत ने कहा, "धर्म में पितृ-धर्म, मातृ-धर्म, पुत्र-धर्म, प्रजाधर्म और राजधर्म शामिल हैं। हमारे इतिहास में, कई लोगों ने धर्म के लिए बलिदान दिया है। यहाँ तक कि आम लोगों ने भी धर्म के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है।"

छत्रपति शिवाजी महाराज का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा, "शिवाजी महाराज ने धर्म की रक्षा के लिए कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने शक्ति और रणनीति के बल पर रास्ता निकाला। उनके जीवन के संघर्ष को फिल्म 'छावा' के माध्यम से और अधिक स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।" उन्होंने आगे कहा, “आज के वैश्विक संघर्षों का मूल धर्म का अभाव है। जहाँ धर्म नहीं है, वहाँ संघर्ष है। इसलिए हिंदू धर्म केवल एक समाज तक सीमित नहीं है, यह एक मानव धर्म है। जो धर्म मानवता का आचरण सिखाता है, वही सच्चा धर्म है। यह संपूर्ण विश्व के समक्ष एक आदर्श के रूप में खड़ा हो सकता है।”

अपने भाषण में उन्होंने अनेकता में एकता का संदेश भी दिया। “एक समान होना एकता की शर्त नहीं है। भारत की विविधता ही इसकी शक्ति है। हम मतभेदों के बावजूद भी एक रह सकते हैं। और यही भारतीयता की अवधारणा है।” उन्होंने धर्म जागरण के कार्य को सामाजिक विकास से जोड़ा। “धर्म केवल किताबों में लिखी बातें नहीं, बल्कि आचरण से सिखाई जाने वाली बातें हैं। धर्म जागरण का अर्थ है व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में धर्म का पालन करना।” भागवत ने धर्म की व्यापक और समावेशी परिभाषा प्रस्तुत करते हुए धर्म पर आधारित समाज और राष्ट्र के निर्माण का आह्वान किया। सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, “धर्म बचेगा तो समाज बचेगा और समाज बचेगा तो राष्ट्र मजबूत होगा।”