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Maharashtra

शरद पवार की पार्टी का कांग्रेस में होगा विलय! इंडी गठबंधन की बैठक में मिला प्रस्ताव, 15 अगस्त तक फैसला लेने की चर्चा


मुंबई: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़ी टूट की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसके साथ ही टीएमसी के कांग्रेस में विलय की अटकलों ने भी राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ लिया है। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं ने ममता बनर्जी को उनकी पार्टी के कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव दिया है। इसी बीच कांग्रेस आलाकमान द्वारा एक अन्य सहयोगी दल को भी ऐसा ही प्रस्ताव दिए जाने की चर्चा सामने आई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार को उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने का सुझाव दिया है। सूत्रों का दावा है कि हालिया राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह प्रस्ताव रखा गया है। मिली जानकारी के अनुसार, शरद पवार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और आगामी 15 अगस्त तक इस संबंध में कोई फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, इन चर्चाओं और दावों पर अभी तक एनसीपी (शरद पवार), तृणमूल कांग्रेस या कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

क्या है असली खबर?
पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के चुनाव पश्च्यात आठ जून को राजधानी दिल्ली में इंडी गठबंधन की बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, आरजेडी सहित 23 पार्टियां शामिल हुई। बैठक में मौजूदा समय की राजनीति और भाजपा के बढ़ते प्रभाव पर कैसे लड़ा लाये। और कैसे हराया जाए इसपर मंथन हुआ। इसी बैठक के बीच एक खबर सामने आई कि, कांग्रेस आलाकमान ने ममता बैनर्जी को अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने का प्रस्ताव दिया। इसको लेकर लगातार चर्चाओं का दौर शुरू है। इन्हीं चर्चाओं के बीच एक और बड़ी खबर सामने आई इसके तहत सोनिया गाँधी ने शरद पवार को भी उनकी पार्टी का विलय कांग्रेस में करने को कहा है। 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पहले यह प्रस्ताव कांग्रेस आलाकमान ने सुप्रिया सुले के जरिये यह शरद पवार को भिजवाया गया। इसके बाद कांग्रेस नेताओ ने सीधे शरद पवार से बात की और आलाकमान के प्रस्ताव को उनके समक्ष रखा। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस ने मौजूदा समय की राजनीति, एनसीपी में हुई टूट, भाजपा के बढ़ते प्रभाव सहित भविष्य की राजनीति का हवाला देते हुए उन्हें एक बार फिर कांग्रेस में वापस आने का सुझाव दिया। यही नहीं कांग्रेस ने सुप्रिया सुले सहित सभी नेताओं का उचित सम्मान रखने की बात भी कही। 

पवार कांग्रेस के प्रस्ताव पर गंभीर!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शरद पवार कांग्रेस के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से इस मुद्दे पर पार्टी नेताओं के साथ विस्तृत चर्चा करने के लिए कुछ समय मांगा है। बताया जा रहा है कि शरद पवार पार्टी की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और भविष्य में उसके प्रभाव व संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पवार इस संभावना पर भी गहन मंथन कर रहे हैं कि यदि पार्टी का कांग्रेस में विलय होता है, तो महाराष्ट्र कांग्रेस की कमान उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले को सौंपी जाए। सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे विषय पर विचार-विमर्श के बाद पवार अगस्त तक कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि, इन चर्चाओं पर अभी तक एनसीपी की तरफ से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। 

पवार के आने-जाने का रहा है इतिहास
शरद पवार की पहचान एक पुराने कांग्रेसी के रूप में होती है। पवार कांग्रेस की टिकट पर पहली बार विधायक और सांसद बने थे। हालांकि, पवार का कांग्रेस तोडना, अलग पार्टी बनाना और फिर कांग्रेस में शामिल होने का इतिहास भी रहा है। पवार ने साल 1978 में शरद पवार ने कांग्रेस से बगावत कर दी थी। उस समय उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) के साथ सरकार बनाई और महज 38 साल की उम्र में महाराष्ट्र के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। लगभग आठ साल तक अलग राजनीतिक राह पर चलने के बाद शरद पवार ने 1986 में कांग्रेस में वापसी कर ली। इसके बाद वे कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हो गए और केंद्र तथा महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

साल 1999 में शरद पवार ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। इसके बाद उन्हें कांग्रेस से बाहर कर दिया गया। इसी घटनाक्रम के बाद शरद पवार, पी. ए. संगमा और तारिक अनवर ने मिलकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का गठन किया। और तब से वह एनसीपी का नेतृत्व कर रहे हैं। लेकिन अलग पार्टी बनाने के बाद भी पवार कांग्रेस से दूर नहीं रहे। महाराष्ट्र में 1999 से 2014 तक कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार रही। वहीं केंद्र में यूपीए सरकार में पवार ने कृषि सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। 

पहले भी मिल चूका है प्रस्ताव 
एनसीपी का कांग्रेस में विलय की चर्चा पहली बार नहीं है। 2024 के विधानसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी को मिली करारी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान ने पवार को उनकी पार्टी का विलय करने का सुझाव दिया था। हालांकि, तब पवार ने इनकार कर दिया था। लेकिन आठ जून को दिल्ली में हुई इंडी गठबंधन की बैठक पश्च्यात फिर एक बार विलय की चर्चा तेज हो गई है। अब यह देखना होगा की इस बार पवार कुछ निर्णय लेते हैं या केवल चर्चा बनकर रह जायेगी।