रसूखदारों की खैर नहीं! देवस्थान की जमीनों से हटेगा अवैध कब्जा; महाराष्ट्र सरकार का अब तक का सबसे बड़ा फैसला!
नागपुर: महाराष्ट्र में देवस्थानों की इनाम जमीनों (Devasthan Inam Lands) को लेकर महाराष्ट्र सरकार (Maharashra Government) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को नागपुर (Nagpur) में मीडिया से बात करते हुए राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे (Chandrashekhar Bawankule) ने साफ किया कि देवस्थानों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने शिवराज्याभिषेक दिन (Shiva's Coronation Day) की शुभकामनाएं देते हुए देवस्थान इनाम उन्मूलन कानून (Devasthan Inam Abolition Act) को लेकर सरकार की आगामी रणनीति को स्पष्ट किया।
राजस्व मंत्री ने बताया कि, "महाराष्ट्र में लगभग 5.5 लाख हेक्टेयर देवस्थान इनाम भूमि है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के काल से विभिन्न देवस्थानों को दी गई थी। लेकिन समय के साथ इन जमीनों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो चुके हैं और कई जगहों पर तो देवस्थानों का प्रत्यक्ष नियंत्रण भी नहीं रह गया है।"
प्रभावशाली लोगों का कब्जा और नया कानून
चंद्रशेखर बावनकुळे ने कहा, "कई देवस्थानों की जमीनों पर टेनेंसी एक्ट (कूळ कायदा) लागू है, तो कई जगहों पर दशकों से लोग काबिज हैं। जमीन देवस्थान के नाम पर होने के बावजूद संबंधित संस्थाएं इसका कोई लाभ नहीं ले पा रही हैं। कई प्रभावशाली और रसूखदार लोगों ने इन जमीनों पर अवैध कब्जे कर रखे हैं, जिससे देवस्थानों को अपने कानूनी हक पाना मुश्किल हो गया है।" इसी स्थिति को सुधारने और देवस्थानों के अधिकार दोबारा स्थापित करने के लिए राजस्व विभाग ने एक स्वतंत्र कानून बनाने की पहल की थी।
क्यों स्थगित हुआ कानून का प्रारूप?
इस कानून का प्रारंभिक मसूदा (Draft) 6 मई को सार्वजनिक किया गया था और इस पर सुझाव व आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 5 जून तक का समय दिया गया था। मंत्री ने बताया कि इस मसूदे पर देवस्थानों, हिंदुत्ववादी संगठनों और संबंधित पक्षों की तरफ से भारी मात्रा में आपत्तियां और सुझाव प्राप्त हुए हैं। इसके कारण कई घटकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। इस संभ्रम को दूर करने के लिए सरकार ने फिलहाल इस प्रारूप को स्थगित करने का फैसला किया है। अब हर एक आपत्ति पर गहराई से सुनवाई की जाएगी।
IAS विकास खारगे की अध्यक्षता में बनी विशेष समिति
नए सिरे से मजबूत कानून तैयार करने के लिए सरकार ने राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) विकास खारगे की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। इस विशेष समिति में:
- 2 विभागीय आयुक्त (Divisional Commissioners)
- 2 जिला कलेक्टर (District Collectors)
- 3 उप सचिव (Deputy Secretaries)
- 15 देवस्थानों के प्रतिनिधि और इस विषय पर कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ने वाले विशेषज्ञ शामिल होंगे।
शीतकालीन सत्र में पेश होगा ऐतिहासिक बिल
टाइमलाइन तय करते हुए राजस्व मंत्री ने बताया कि 15 अगस्त तक सभी प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विस्तृत सुनवाई पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद 15 सितंबर तक नए कानून का अंतिम मसूदा तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की योजना आगामी दिसंबर में होने वाले विधानमंडल के शीतकालीन सत्र (Winter Session) में इस संशोधित और सुधारे गए कानून को पेश करने की है।
उन्होंने अंत में दृढ़ता से कहा कि जो जमीनें पिछले 100 या 200 वर्षों से देवस्थानों के कब्जे में नहीं हैं, उनके लिए अलग से नीति तय की जाएगी। कुछ मामलों में जमीनें सीधे वापस मिल सकती हैं, तो कुछ जटिल मामलों में बीच का रास्ता निकाला जाएगा। लेकिन किसी भी परिस्थिति में देवस्थानों के हितों से समझौता नहीं होगा और 5.5 लाख हेक्टेयर जमीनों का संरक्षण करने वाला मजबूत कानून राज्य में लागू होकर रहेगा।
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