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Wardha

Wardha: विकास को तरसता आर्वी, न उद्योग लग रहे न रोजगार मिल रहा


आर्वी. देश को आजाद हुए 75 साल पूरे हो गए. हम देश की आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं. किंतु इसे आर्वी विधानसभा क्षेत्र का दुर्भाग्य कहा जाएगा कि, इस क्षेत्र का औद्योगिक विकास जीरो है. जिले की अन्य तहसीलों की तुलना में इस तहसील का औद्योगिक विकास नगण्य है. उद्योग के संबंध में कोई भी योजना बनाई जाती है तो आर्वी तहसील को छोड़ दिया जाता है. फलस्वरूप तहसील में सुशिक्षित  बेरोजगारों की फौज तैयार हो गई है. 

कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नई औद्योगिक नीति बनाई गई थी, जिसके अनुसार भारत सरकार संपूर्ण देश में 61 औद्योगिक विकास केंद्र खोलने वाली थी. जिसमें से महाराष्ट्र सरकार ने 8 नाम भेजे थे. इसमें आर्वी का नाम भी शामिल था. उस समय क्षेत्र के नेताओं से काफी आशा है थी किंतु औद्योगिक विकास की योजनाएं कागजों में सिमट कर रह गई. 

शहर में बड़ा उद्योग एक भी नहीं है. एमआईडीसी की आस लगाए बैठे सुशिक्षित बेरोजगार उनके हाथों को काम न मिलने की वजह से पलायन कर रहे हैं. उद्योग धंधे ना होने की वजह से शिक्षित बेरोजगार  अवैध व्यवसाय की ओर झुकते दिखाई दे रहे हैं. उद्योग खोलने के लिए एमआईडीसी की आवश्यकता होती है. लघु उद्योग किसानों के माल की कपास की जिनिंग प्रेसिंग सरकी से तेल निकालकर खली, ढेप का निर्माण करने, कपास से सूत तथा सूत से कपड़ा  सूत के कपड़े जैसे बड़े उद्योग को भी एमआईडीसी में खोले जा सकते हैं. 

किसानों को उर्वरक उद्योग के नाम पर भी अनेक उद्योग क्षेत्र में खोले जा सकते हैं. जैसे  दलहन, सोयाबीन से सोया तेल तथा  ढेप तथा अरंडी तेल मिल आदि अनेक उद्योग ऐसे हैं, जिन्हें यहां खोला जा सकता है. 21वीं सदी में सारा काम इंटरनेट से  होने लगा है. इसके लिए एमआईडीसी का होना जरूरी है. नेशनल हाईवे, राज्य हाईवे का काम जोर शोरों से शुरू है तथा कुछ हो चुके हैं. मुंबई-कोलकाता नेशनल हाईवे इस क्षेत्र से ही होकर गुजरता है. इसके बावजूद भी एमआईडीसी का ना होना, एक दुर्भाग्य है. कच्चा माल लाने तथा पक्का माल पहुंचाने के लिए कोई असुविधा नहीं है. किंतु एमआईडीसी का होना अत्यंत आवश्यक है. एमआईडीसी के लिए कोशिशें अनेक बार की गईं. लेकिन वे असफल रहीं. 

एमआईडीसी के लिए नगर के पास वर्धा रोड पर सावलापुर के पास 48 एकड़ जमीन के लिए किसानों को जमीन का विकास ना करने संबंधी नोटिस राजस्व विभाग ने दिया था. जिसके कारण 4 किसानों ने अपनी जमीन का विकास भी नहीं किया. किंतु जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की वजह से एमआईडीसी परियोजना कागजों पर ही सिमट कर रह गई. सारंगपुरी तालाब परिसर में भी जगह उपलब्ध हो सकती है. दिवंगत डॉ. शरद काले के समय उद्योग मंत्री सुधाकर नाईक ने आर्वी में एमआईडीसी की घोषणा की थी. किंतु वह भी हवा में उड़ गई. 

देऊरवाड़ा के पास वर्धा नदी के किनारे कपास पर आधारित कपड़ा मिल की चर्चा थी. लेकिन प्रस्ताव धरा का धरा रह गया. तत्कालीन विधायक ने किसानों को मजदूर ना मिलने की बात कहकर इस प्रस्ताव का विरोध किया था. इसके पश्चात विधायक दादाराव  केचे, पूर्व विधायक अमर काले ने भी एमआईडीसी हेतु प्रयास किए थे और प्रयास कर रहे हैं. परंतु एमआईडीसी का मुहूर्त कब निकलेगा कहा नहीं जा सकता. तलेगांव के पास सैकड़ों एकड़ जमीन खरीद कर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सरकारी तत्वों पर शक्कर कारखाना खोलने वाले थे, किंतु वह भी खुल नहीं पाया है.