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बीच सड़क पर भाजपा का हाईवोल्टेज ड्रामा, सुमित वानखेड़े और दादाराव केचे के गुटों में झड़प; केचे को घेरकर गाली-गलौज


वर्धा: स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद अब जीत से ज्यादा हार की चर्चाएं जोरों पर हैं। वर्धा के आर्वी में यह राजनीतिक कलह अब खुलकर सामने आ गई है। आर्वी भाजपा के दो गुटों के बीच का विवाद अब सीधे सड़क पर उतर आया है और हार का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ा जा रहा है।

आर्वी में भाजपा के दो गुट सक्रिय हैं - एक विधायक सुमित वानखेड़े का और दूसरा विधान परिषद सदस्य (MLC) दादाराव केचे का। हाल ही में हुए चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों की हार हुई और इस हार की गूँज अब सुनाई देने लगी है। 

विधान परिषद विधायक दादाराव केचे जब रात में अस्पताल से घर लौट रहे थे, तभी भाजपा के ही कुछ हारे हुए उम्मीदवारों ने उन्हें बीच सड़क पर रोक लिया। इन उम्मीदवारों ने केचे का घेराव करते हुए उनका रास्ता रोक दिया। उम्मीदवारों ने सीधा आरोप लगाते हुए उनसे जवाब माँगा कि "आपने विपक्षी दल की मदद की, इसीलिए हमारी हार हुई।"

देखते ही देखते यह विवाद बड़े हंगामे में बदल गया। इस दौरान न केवल जवाब माँगा गया, बल्कि अभद्र गाली-गलौज किए जाने का मामला भी सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही दादाराव केचे के समर्थक भी वहाँ पहुँच गए। दोनों गुटों के आमने-सामने आने से स्थिति बेकाबू होने का डर पैदा हो गया था। बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस ने तुरंत मौके पर दौड़ लगाई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर किया और कड़ी मशक्कत के बाद विधायक दादाराव केचे को सुरक्षित बाहर निकाला।

इस घटना के कारण आर्वी भाजपा में चल रही गुटबाजी अब जगजाहिर हो गई है। हार के गुस्से में अपनी ही पार्टी के विधायक का घेराव करने तक कार्यकर्ताओं की हिम्मत बढ़ जाने से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अब इस विवाद के कारण आर्वी की राजनीति क्या नया मोड़ लेती है, यह देखना अहम होगा।