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Wardha

Wardha: महावितरण की ख़राब नीति के कारण किसान मुश्किल में, फसलो को सिंचाई करना हो रहा मुश्किल


हिंगनघाट (सं). तहसील के किसान इन दिनों महावितरण की अडियल नीति के कारण परेशान है़ रबी मौसम में बिजली की आंखमिचौली शुरू है. जिस वजह से खेत में फसलो को सुचारु तरिके से सिंचाई कर पाना मुश्किल हो रहा है़ प्राकृतिक संकट की वजह से खरीफ मौसम अतिवृष्टि में गया. अब महावितरण की नीति से रबी मौसम में बिजली संकट की वजह से सिंचाई की समस्या पैदा हो रही है़ खरिफ के साथ रबी मौसम भी हाथ से निकल जाने पर परिवार का पालनपोषण कैसे करें. कर्ज कैसे चुकाये, किसान ने सिर्फ आत्महत्या ही करने की क्या? इस प्रकार के प्रश्न क्षेत्र के किसान सरकार से पुछ रही है। 

हिंगनघाट तहसील परिसर में खरीप मौसम के साथ रबी मौसम भी महावितरण कंपनी द्वारा बार बार खंडित व बिजली आपूर्ति से संकट में पडा है. कुएं में पानी होकर भी बिजली की आंखमिचौली से फसल को पानी नही दे सकते. इसके पूर्व किसान पर प्राकृतिक आपदा आयी. बाद में बिजली की आंखमिचौली से फसल को महावितरण निर्मित आपत्ति किसान पर आने से किसान संताप व्यक्त कर रहे. कभी सूखा तथा अतिवृष्टि तथा प्रतिकूल वातावरण से खेत फसल पर परिणमा होकर किसान संकट में आया है. 

हिंगनघाट तहसील में महावितरण कंपनी ने सिंचाई के लिए दिन में चार दिन रात्रि में तीन दिन ऐसी बिजली आपूर्ति करे. अब दिन में होनेवाली बिजली आपूर्ति तकनीकी मरम्मत के नाम पर खंडित की जाती है. रात्रि में बिजली आपूर्ति की वजह से सिंचाई करते समय किसान को हमेशा डर रहता है. क्योंकि रात्रि के समय खेत परिसर में वन्य पशूओं का मुक्त संचार होता है. यह वन्य पशू कब किसान पर हमला करेंगे. यह बता नही सकते. जिसकी वजह से किसान महावितरण कंपनी पर नाराजी व्यक्त कर रहे है. इसके बदले औद्योगिक वसाहत को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाती है. 

खेती के लिए आठ घंटे बिजली वह भी चार दिनों तक होगी. जिसमें बार बार बिजली खंडित होती है. इसलिए रबी फसल पर संकट आन पडा है. किसानों ने दिन में काम करने का और रात्रि में सिंचाई के लिए खेत में जाने का. ऐसा चित्र दिख रहा है. इस गंभीर प्रकार की वजह से किसान को भारी परेशानी का सामना करना पड रहा है. गृहमंत्री तथा जिले के पालकमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर भी जिले के किसानों ने गुहार लगायी है़ महावितरण को सख्त निर्देश होते हुए भी बिजली आपूर्ति सेवा खंडीत की जा रही़ इस ओर सरकार ने गंभीरता से ध्यान देने की मांग है़