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Wardha

Wardha: बोर बांध का करें आधुनिकीरण, नहरे तोड रही दम


वर्धा: जिले के बडे प्रकल्प के रूप में गिने जाने वाले बोर प्रकल्प की नहरे दम तोड रही है. विविध समस्याओं के चलते नहरों से छोडा जा रहा पानी कही वरदान तो कही शापित बन रहा है. बांध होते हुए भी सिंचाई का लक्ष हासिल नहीं हो रहा है. परिणामवश बोर बांध की नहरों का आधुनिकीकरण करना आवश्यक हो गया है. जिसके लिये सरकार स्तर प्रयास होना आवश्यक है.

जिले के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो इस उद्देश्य से सरकार ने बोर नदी पर सेलू तहसील में बांध का निर्माण किया है. सन 1957 में बांध का निर्माण कार्य आरंभ किया गया था. आठ वर्ष के भितर सन 1965 में बांध का निर्माण कार्य पुर्ण हुआ. वहीं छोटी तथा बडी नहरों का काम 1965 से 1970 तक पुर्ण हुआ. उक्त कार्य पर तब 388 लाख रूपये खर्च हुये थे. प्रकल्प की जल क्षमता 138.75 द.ल.घ.मी. है. बांध व नहरों का निर्माण पुर्ण होने के बाद सेलू, वर्धा व हिंगनघाट तहसील के अनेक गावों के किसानों को सिंचाई के लिये पानी मिला. नतिजन यह प्रकल्प तिनों तहसीलों के लिये वरदान साबित हुआ.

16,194 हेक्टर सिंचाई क्षमता

बोर प्रकल्प की कुल सिंचाई क्षमता 16 हजार 194 हेक्टर है. परंतु नहरों की हालत खस्ता होने के कारण वर्तमान में सिंचाई क्षमता पर बुरा प्रभाव पडा है. गत पांच वर्षा को अवलोकन करे तो केवल 50 से 60 प्रश तक ही सिंचाई हो रही है. 2020-21 में 11 हजार 38 हेक्टर क्षेत्र में सिंचाई हुई थी. किंतु उसके पहले के 4 वर्ष का अवलोकन करे तो औसतन 50 प्रश तक ही क्षेत्र में सिंचाई हुई है.

कर्मियों की कमी का भी हो रहा असर

सिंचाई विभाग के सेलू उपविभाग में केवल 10 से 12 प्रश कर्मचारी वर्तमान में कार्यरत होने के कारण उसका बुरा असर सिंचाई व अन्य कामों पर हो रहा है. अधिकारी व कर्मचारियों का कहना है की, मनुष्यबल की कमी होने के कारण सभी और ध्यान देना संभव नही है. सिंचाई के लिये पानी छोडते समय भी अनेक बार कम मनुष्यबल के कारण दिक्कते आती है.

नहरों की हालत खस्ताहाल

बांध की नहरे 50 वर्ष पुरानी होने के कारण आज अनेक जगह नहर फुट गई है. साथ ही समय समय पर उसकी रखरखाव नही होने के कारण नहरों घांसफुस के साथ ही पडे उग चुके है. जिससे कैनल से पानी बहते समय अनेक बाधांए निर्माण होने के कारण कैनल का पानी खेतों में घुंस जाता है. तो अनेक जगह पर कैनल से पानी का रिसाव होने के कारण किसानों को लिये खेती करना कठीण हो गया है. खेती तक जानेवाली छोटी नहरे अनेक जगह बुझ जाने की प्रतिवर्ष शिकायते बढ रही है. नहरों की खस्ताहाल के चलते सिंचाई टारगेट विभाग पुर्ण नही कर पा रहा है. 

शिकायतों की और अनदेखी

नहरों के संदर्भ में सिंचाई विभाग की और निरंतर शिकायते की गई है. किंतु शिकायतों की और कोई ध्यान नही देता. कैनल की साफसफाई व रखरखाव प्रतिवर्ष होना आवश्यक है.यह कार्य पानी छोडने के पुर्व होना चाहिए, परंतु निधी की कमी व अन्य कारणों के कारण ऐसा नही होता है. अध्सिकारी भी अब ध्यान देने के लिये तैयार नही रहते है. पानी वापर संस्थाओं व्दारा शिकायते करने के बावजूद कोई कार्यवाही नही होने के कारण संस्था नाममात्र रहने के कारण अनेक पदाधिकारियों ने अपने त्याग पत्र सौंपे है.