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उच्च न्यायालय का किसानों व वणी बाजार समिति को राहत, व्यापारियों को 15 दिनों के भीतर पैसे देने का दिया आदेश


  • व्यापारियों को 15 दिनों के भीतर अनाज की रकम जमा करने के दिए आदेश

वणी. बाजार  समिति में वर्धमान ट्रेडर्स (प्रोप्रा  धीरज अमरचंद सुराणा) के पूर्व खरीददार और उनके जमींदार रूपेश कोचर ने संयुक्त रूप से बीते 5 जनवरी से 11 जनवरी के दौरान 147 किसानों का 1935 क्विंटल सोयाबीन, तुअर, चना खरीदी किया था. इस अनाज की रकम, बाजार समिति की फीस और सरकार के सुपरवीजन कॉस्ट फीस कुल  रकम 1,14,69,155 ऑनलाइन जमा नहीं करायी और सरकार के साथ धोखाधडी की. जिसके बाद बाजार समिति ने  महाराष्ट्र कृषि उपज खरीदी विक्री (विकास व विनियमन) अधिनियम 1963 की धारा  57 अंतर्गत उक्त रकम ब्याज के साथ वसूल कराने के संबंध में 3 फरवरी को न्यायालय में मामला दाखिल किया.

न्यायालय ने 4 मार्च को आदेश पारित करते हुए से. वर्धमान ट्रेडर्स (प्रोप्रा.  धीरज अमरचंद सुराणा) अनाज खरीददार और  रुपेश नवरतमल कोचर जमींदार के और दोनों परिवार के अन्य सदस्यों के नाम रहनेवाली अन्य स्थावर संपत्ति की नीलामी कर वसूली कर किसानों के कृषिउपज की रकम 1 करोड 13 लाख 78 हजार  131  , बाजार समिति का शुल्क 85335 और सरकार के सुपर वीजन कास्ट शुल्क की रकम 5 हजार 689 रुपए कुल रकम 1,14,69,155 रकम 12 जनवरी 2022 से 12 फीसदी दर से दंडसहित वसूल करने का आदेश दिया. जिलाधिकारी के उक्त आदेश के बाद राजस्व नायब तहसीलदार ने वसूली की प्रक्रिया शुरू की है.

उक्त प्रक्रिया के विरोध में रूपेश नवरतमल कोचर ने उच्च न्यायालय के नागपुर खंडपीठ में रिट पीटीशन नंबर 2798/2022 के तहत मामला दाखिल कर स्थगनादेश प्राप्त किया. किंतु मामला उच्च न्यायालय में न्याय प्रविष्ठ रहते समय मामले से जुडी एक संपत्ति की बिक्री की.

उच्च न्यायालय के नागपुर खंडपीठ में 14 अक्तूबर को आदेश पारित कर उल्लेख किया कि बीते 21 अक्तूबर तक न्यायाधिकरण तथा सहकारी संस्था झरी जामणी के पास संबंधितों ने मौजूद रहकर अपनी बात रखनी होगी. रूपेश नवरतमल कोचर ने 14 अक्तूबर से 15 दिनों के भीतर यानि 28 अक्तूबर तक 17,50,000 रुपए न्यायाधिकरण के पास जमा करने, उक्त रकम जमा करने के बाद न्यायाधीश ने  30 दिनों के भीतर मामले का फैसला सुनाने और रुपेश कोचर द्वारा रकम का भुगतान नहीं करने पर उच्च न्यायालय में दाखिल रिट पीटीशन रद्द करने की जानकारी दी गई.

इस मामले में उच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील मिलींद वडोदकर व इशिता मिलिंद बडोदकर ने बाजार समिति का पक्ष रखा. मामले में वणी कृषि उपज बाजार समिति सचिव अशोक झाडे ने हर बार कानूनी प्रक्रिया पूरी की. जिसके बाद मामले में किसान, बाजार समिति व सरकार को उनकी रकम मिलने की राह आसान हो गई है.