logo_banner
Breaking
  • ⁕ नागपुर में मदर डेयरी को बम से उड़ाने की धमकी, गिट्टीखदान पुलिस जांच में जुटी ⁕
  • ⁕ NEET Exam: पेपर लीक विवाद के बाद अमरावती में अभूतपूर्व सुरक्षा, परीक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन ने की 'मॉक ड्रिल' ⁕
  • ⁕ विदर्भ में कुदरत का डबल अटैक: रिकॉर्डतोड़ गर्मी के बीच आंधी-बिजली का हाई अलर्ट, ब्रह्मपुरी 43.2 और वर्धा 43 डिग्री पर झुलसा ⁕
  • ⁕ Chandrapur: 11 नाम... 4 राज्य और ठगी का खेल; साइबर पुलिस ने हाईटेक महाठग का किया पर्दाफाश ⁕
  • ⁕ NEET सेंटर विवाद में बड़ा ट्विस्ट! NTA बोली- अभ्यर्थी ने खुद चुना था एग्जाम सिटी"; पिता तालिब ने दावे को किया ख़ारिज ⁕
  • ⁕ अमरावती में भारी हंगामा: किरीट सोमैया की गाड़ी के आगे लेटे MIM कार्यकर्ता, पुलिस ने बल प्रयोग कर हटाया ⁕
  • ⁕ खड़ी निजी बस में लगी आग, टेकड़ी रोड के एमपी बस स्टैंड की घटना; परिसर में मचा हड़कंप ⁕
  • ⁕ विदर्भ सहित राज्य के 247 नगर परिषदों और 147 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित, देखें किस सीट पर किस वर्ग का होगा अध्यक्ष ⁕
  • ⁕ अमरावती में युवा कांग्रेस का ‘आई लव आंबेडकर’ अभियान, भूषण गवई पर हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ⁕
  • ⁕ Gondia: कुंभारटोली निवासियों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नगर परिषद पर बोला हमला, ‘एक नारी सबसे भारी’ के नारों से गूंज उठा आमगांव शहर ⁕
Akola

मूंग और उड़द से किसानों का हो रहा मोहभंग, एक दशक में 75 प्रतिशत रकबा हुआ कम


अकोला: जुलाई और अगस्त में हुई मूसलाधार बारिश के कारण फसल को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा कई प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि, किसानों का अब मूंग, अरहर और उड़द जैसे दाल की फसलों के प्रति मोहभंग होता जा रहा है। पिछले एक दशक में इन फसलों के रकबे में 75 प्रतिशत की कमी आई है। बारिश और कीड़ो के कारण किसानों को लगता निकालने की मुश्किल हो रही है। जिसके कारण किसान इन फसलों से दूर होते जा रहे हैं।  

पिछले एक दशक से मूंग, उड़द की फसल प्राकृतिक आपदाओं से बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालांकि, ये फसलें दालें होने के साथ-साथ कम अवधि में भी आती हैं और ये पारंपरिक फसलों के अंतर्गत आती हैं। इसलिए किसानों ने इन फसलों की खेती शुरू कर दी थी। लेकिन, चूंकि इन फसलों की उत्पादन लागत कम नहीं हो रही है, इसलिए इन फसलों के क्षेत्र में बड़ी कमी आई है। जिले में मूंग, उडीदा के औसत क्षेत्रफल का 75 प्रतिशत घट गया है। ऐसे में इन फसलों के रखरखाव के लिए संघर्ष कर रहे किसान प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आ रहे हैं।

जितना लगाया उतना ही निकल जाए  

इस साल जिन किसानों ने मूंग, उड़द की बुवाई की है, उन्हें चिंता है कि फसल उत्पादन पर हुए खर्च की वसूली होगी भी या नहीं। किसान लगातार फसलों को कीड़ो से बचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बारिश के कारण उन्हें बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले सीजन में उपज साढ़े तीन क्विंटल प्रति एकड़ तक थी। इस बार किसानों को लगता है जितना लगाया है उतना भी निकल जाए वही बहुत है। 

कितना उत्पाद होगा पता नहीं

किसानों का कहना है कि, इस बार 28 जून को बुवाई के बाद 4 जुलाई से लगातार बारिश हुई, जिसके कारण फसलों पर छिड़काव के लिए भी समय और उचित वातावरण नहीं मिल पाया है। अधिक बारिश के कारण फसल नहीं हुई है। इन कमजोर पेड़ों को कितनी फली की जरूरत होगी और उन्हें कितनी उपज मिलेगी, इसके बीच कोई संबंध नहीं है।


  1. 10 साल में घटना रकबा