logo_banner
Breaking
  • ⁕ वर्धमान नगर- डिप्टी सिग्नल "बहरीन बाई सोनबोइर" फ्लाईओवर जनता को समर्पित, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया उद्घाटन ⁕
  • ⁕ Gondia: सखी वन स्टॉप सेंटर की तत्परता: बिहार और भुसावल की दो लापता महिलाएं सकुशल पहुंचीं घर ⁕
  • ⁕ Chandrapur: ड्रग्स मुक्त बनाने की ओर बड़ा कदम: पुलिस ने नष्ट किया 66 लाख रुपये का मादक पदार्थ ⁕
  • ⁕ Nagpur: कोथुलना के पास लहसुन से भरा ट्रक पलटा, दो गंभीर रूप से घायल; स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग ⁕
  • ⁕ Nagpur: आर्थिक अनियमितता के मामले में बड़ी कार्रवाई: अरोली की सरपंच रोशनी भुरे अपात्र घोषित, अपर आयुक्त का फैसला ⁕
  • ⁕ Bhandara: तुमसर में सफाई कर्मचारियों ने मुख्याधिकारी की गाड़ी घेरी, आमरण अनशन शुरू ⁕
  • ⁕ रिश्ते शर्मसार: मां दूध लेने गई बाहर, कलयुगी पिता ने अकेली नाबालिग बेटी से की अश्लील हरकत; विरोध करने पर पीटा, गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ विदर्भ सहित राज्य के 247 नगर परिषदों और 147 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित, देखें किस सीट पर किस वर्ग का होगा अध्यक्ष ⁕
  • ⁕ अमरावती में युवा कांग्रेस का ‘आई लव आंबेडकर’ अभियान, भूषण गवई पर हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ⁕
  • ⁕ Gondia: कुंभारटोली निवासियों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नगर परिषद पर बोला हमला, ‘एक नारी सबसे भारी’ के नारों से गूंज उठा आमगांव शहर ⁕
Amravati

Amravati: हर तीस मिनट में एक किसान की हो रही मौत, जिले में सबसे ज्यादा आत्महत्या


अमरावती: जिले में साल भर के दौरान किसान आत्महत्याओं का जो सिलसिला कम हुआ था, वह फिर से बढ़ गया है। इस साल के छह महीनों में 152 किसानों की मौत हो चुकी है. ये किसान आसमानी और सुल्तानी संकट के शिकार हो गये हैं. यह एक ज्वलंत सच्चाई है कि पश्चिम विदर्भ में सबसे ज्यादा किसान आत्महत्याएं अमरावती जिले में हो रही हैं।

प्राकृतिक आपदाओं, बांझपन, सूखा, कर्ज, बीमारी, लड़के-लड़कियों की पढ़ाई, लड़कियों की शादी आदि के कारण हर 30 घंटे में एक किसान की मौत हो जाती है। पिछले साल बुलडाणा और यवतमाल जिलों में किसानों की आत्महत्या की दर बढ़ रही थी। फरवरी महीने को छोड़कर इस साल के छह महीनों में अमरावती जिले में आत्महत्या की दर बढ़ती जा रही है। लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की अनदेखी के कारण किसानों के संघर्ष पर अवसाद हावी हो रहा है।

जनवरी 2001 से जिले में किसान आत्महत्याएं दर्ज की गई हैं। इस बीच जिले में 5094 किसानों की मौत हो चुकी है। इनमें से 2588 मामले सरकारी सहायता के लिए पात्र हैं जबकि 2463 अपात्र हैं। इसके अलावा 43 मामले अभी भी जांच के लिए लंबित हैं।