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अमरावती में एक साल में 1140 किसानों ने की आत्महत्या, 517 थे सरकारी सहायता के पात्र


अमरावती: अनियमित बारिश के कारण पश्चिम विदर्भ में रबी सीजन खतरे में पड़ गया है। बाजार में उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण किसानों में निराशा का माहौल है। वर्ष के दौरान अमरावती संभाग में 1140 किसानों ने आत्महत्या की है।

दो साल पहले, जिले के किसानों ने इस ख़रीफ़ सीज़न में सोयाबीन और कपास का विकल्प चुना क्योंकि सोयाबीन और कपास को अच्छी कीमत मिलती थी। लेकिन, अनियमित बारिश के कारण फसल की वृद्धि रुक ​​गई। उत्पादकता प्रभावित हुई। वापसी की बारिश ने नुकसान पहुंचाया। कई तहसीलों में कपास काली हो गई, कपास की गुणवत्ता में गिरावट आई। 

कृषि उपज का मूल्य नहीं मिलने से किसानों में निराशा है। किसान हताश महसूस कर रहे हैं। कम उत्पादन का असर कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और बंजरता तथा कर्ज़ के कारण किसानों की आत्महत्याएँ बढ़ी हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2023 से दिसंबर के अंत तक अमरावती संभाग में 1140 किसानों की आत्महत्या की सूचना मिली है। इसमें 517 मामले सरकारी सहायता के पात्र थे। 

इसके अलावा 317 मामलों को सरकारी सहायता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है, जबकि 235 मामले 11 महीने से जांच के लिए लंबित हैं। राज्य में अमरावती संभाग में किसानों की आत्महत्या की संख्या सबसे अधिक है।