logo_banner
Breaking
  • ⁕ Yavatmal: ACB की बड़ी करवाई, रिश्वत लेते दो अधिकारी गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ Amravati: अमरावती में दो धारदार तलवारें लेकर दहशत फैलाने वाले शख्स को पुलिस ने दबोचा ⁕
  • ⁕ Gondia: उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय अजित पवार के अस्थि कलश का गोंदिया में भावुक दर्शन, कोरणी घाट पर होगा अस्थि विसर्जन ⁕
  • ⁕ Bhandara:कांग्रेस को झटका, ओबीसी जिलाध्यक्ष शंकर राऊत ने भाजपा में किया प्रवेश ⁕
  • ⁕ Bhandara: किसानों का पटाखा फोड़ आंदोलन, धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाने की मांग ⁕
  • ⁕ नई दिल्ली में दिवंगत अजित पवार की श्रद्धांजली सभा, सांसद प्रफुल्ल पटेल ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ में जल्दबाजी को लेकर दिया जवाब ⁕
  • ⁕ मनपा के अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को लेकर कांग्रेस आक्रामक; मनपा के बाहर किया जोरदार आंदोलन, एक तरफा कार्रवाई का लगाया आरोप ⁕
  • ⁕ Akola: खुदको आईबी अधिकारी बताकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में घुसपैठ करने वाले आरोपी को तीन दिन की पुलिस हिरासत ⁕
  • ⁕ Yavatmal: मुलावा फाटा-सावरगाव रोड पर रोंगटे खड़े करने वाला हादसा, युवक का सिर 12 किमी तक टैंकर में रहा फंसा ⁕
  • ⁕ Amravati: वलगाव में खेत में किसान के साथ अज्ञात लोगों ने की मारपीट, डॉक्टरों की लापरवाही से किसान की मौत होने का आरोप ⁕
Amravati

चांदूर बाजार के देऊरवाड़ा में मिला प्राचीन शिव मंदिर, खोज बनी ऐतिहासिक और धार्मिक चर्चा का कारण


अमरावती: जिले के चांदूर बाजार स्थित देऊरवाड़ा गांव में पूर्णा और मेगा नदियों के संगम के पास, पूर्णा नदी के किनारे एक प्राचीन शिव मंदिर का अवशेष मिला है। यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना होने का अनुमान है और यह जमीन के अंदर दबा हुआ था। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इस मंदिर का संबंध भानू तीर्थ से जोड़ा जा रहा है। यह खोज इलाके में ऐतिहासिक और धार्मिक चर्चा का कारण बन गई है।

देऊरवाड़ा गांव एक प्राचीन धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां नृसिंह मंदिर भी स्थित है, जिसके बारे में मान्यता है कि भगवान नृसिंह ने राक्षस हिरण्यकश्यप का वध करने के बाद अपने रक्त से सने पंजे इस क्षेत्र की पयोष्णी नदी में धोए थे। पयोष्णी नदी को इस क्षेत्र में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है, जबकि पूर्णा नदी को वैष्णवी नदी माना जाता है।

देऊरवाड़ा क्षेत्र में 18 प्रमुख तीर्थ स्थल होने का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में किया गया है। हाल ही में प्राप्त मंदिर भानू तीर्थ के अंतर्गत आता है। यह मंदिर नृसिंह मंदिर के पास मुस्लिम समुदाय के मो असलम और आजम के खेत में मिला है। मंदिर की संरचना पारंपरिक सामग्री से बनी है और इसमें एक प्राचीन शिवलिंग पाया गया है। गांव वासियों के अनुसार, यह मंदिर पहले पूर्णा नदी के महापुर के कारण दब गया था, और समय के साथ गाद में दफन हो गया था।