Amravati News: भूजल स्तर गिरने से गहराएगा जल संकट! GSDA का अलर्ट, 554 गांवों में जनवरी से पानी की किल्लत की आशंका
अमरावती: जिले में इस साल बारिश की भारी कमी के कारण भूजल का पुनर्भरण प्रभावित हुआ है। इसका असर अब भूजल स्तर पर दिखाई देने लगा है। भूजल स्तर में गिरावट के चलते आने वाले महीनों में जिले के सैकड़ों गांवों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। जिला भूजल सर्वेक्षण एवं विकास एजेंसी (GSDA) ने संभावित जल संकट को लेकर जिला प्रशासन को सतर्क किया है।
GSDA के अनुमान के मुताबिक, जनवरी से मार्च के बीच जिले की छह तहसीलों के 554 गांवों में पानी की किल्लत हो सकती है। वहीं, अप्रैल से जून के दौरान स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई गई है।
12 तहसीलों में 3 से 10 फीट तक गिरा भूजल स्तर
जिले के 63 जलग्रहण क्षेत्रों में स्थित 136 निगरानी कुओं के भूजल स्तर का रिकॉर्ड लेकर पिछले पांच वर्षों के औसत से तुलना की गई। इस विश्लेषण में जिले की 12 तहसीलों में भूजल स्तर 3 से 10 फीट तक नीचे जाने की बात सामने आई है। बारिश की कमी के कारण भूजल का पर्याप्त पुनर्भरण नहीं हो पाया। ऐसे में गर्मी के मौसम में पेयजल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
छह तहसीलों के 554 गांवों पर संकट
GSDA के अनुमान के अनुसार, जनवरी से मार्च के बीच भातकुली, चिखलदरा, मोर्शी, वरुड, धामणगांव रेलवे और तिवसा तहसीलों के 554 गांवों में जल संकट की आशंका है। इन क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट के कारण कुओं और अन्य जलस्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो ग्रामीणों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
अप्रैल से जून के बीच 690 गांव प्रभावित होने की आशंका
पानी की कमी के तीसरे चरण यानी अप्रैल से जून के दौरान हालात और बिगड़ने का अनुमान है। अचलपुर और अंजनगांव सुर्जी को छोड़कर जिले की शेष 12 तहसीलों के गांवों में जल संकट का खतरा जताया गया है। इस अवधि में करीब 690 गांवों को संभावित जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। भूजल स्तर में गिरावट और बारिश की कमी को देखते हुए आने वाले गर्मी के मौसम में पेयजल व्यवस्था जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
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