अमरावती को मिली बड़ी सौगात! एयर इंडिया फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी को DGCA की मंजूरी, जल्द शुरू होगी पायलटों की ट्रेनिंग
अमरावती: महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के लिए विमानन क्षेत्र से एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अमरावती के बेलोरा एयरपोर्ट पर स्थापित की जा रही एयर इंडिया फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी को आज, 30 अक्टूबर 2026 को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की ओर से सर्टिफिकेट ऑफ अप्रूवल जारी कर दिया गया है। इस मंजूरी के साथ ही अमरावती में देश के पायलट प्रशिक्षण क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। एयर इंडिया और महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (MADC) की संयुक्त पहल से तैयार हो रही यह एकेडमी दक्षिण एशिया के सबसे बड़े फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) में शामिल होने जा रही है।
95 प्रतिशत काम पूरा, 34 प्रशिक्षण विमान पहुंचे
बेलोरा एयरपोर्ट पर इस एकेडमी का लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। प्रशिक्षण के लिए कुल 34 विमान भी पहुंच चुके हैं। इनमें 31 सिंगल इंजन पाइपर आर्चर विमान और 3 ट्विन इंजन डायमंड DA42 NG विमान शामिल हैं। इन विमानों में आधुनिक Garmin G1000 NXi कॉकपिट सिस्टम और ADS-B तकनीक उपलब्ध है। एकेडमी का संचालन अगले एक महीने के भीतर शुरू होने की उम्मीद है। पहले बैच में लगभग 180 प्रशिक्षु पायलटों को शामिल किए जाने की योजना है।
10 एकड़ में तैयार हुआ आधुनिक प्रशिक्षण परिसर
एयर इंडिया की यह फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में विकसित की गई है। यहां प्रशिक्षु पायलटों के लिए आधुनिक क्लासरूम, हॉस्टल, भोजन व्यवस्था, ब्रीफिंग रूम, विमान हैंगर और मेंटेनेंस सुविधाएं तैयार की गई हैं। इसके अलावा प्रशिक्षण के लिए तीन फ्लाइट सिम्युलेटर भी उपलब्ध होंगे। इनमें दो सिंगल इंजन और एक मल्टी इंजन विमान का सिम्युलेटर शामिल है। प्रत्येक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के साथ छह प्रशिक्षुओं का अनुपात रखने की योजना है, ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा सके।
18 महीने का होगा पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम
इस एकेडमी में कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) के लिए लगभग 18 महीने का प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक प्रशिक्षु को कुल 200 घंटे की उड़ान का अनुभव हासिल करना होगा। इसमें 185 घंटे सिंगल इंजन और 15 घंटे मल्टी इंजन विमान से उड़ान प्रशिक्षण शामिल रहेगा। अमरावती की अनुकूल मौसम परिस्थितियों के कारण यहां साल में 300 से अधिक दिन उड़ान प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त रहने की संभावना जताई गई है।
विदर्भ के आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना को केवल एक फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी के रूप में ही नहीं, बल्कि अमरावती और पूरे विदर्भ के आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां पायलट प्रशिक्षण के अलावा विमान रखरखाव, तकनीकी सेवाओं, प्रशिक्षकों, प्रशासनिक कार्यों और अन्य सहायक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। MADC के अनुसार, इस परियोजना से विमानन क्षेत्र में 3,000 से अधिक रोजगार अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके साथ ही होटल, परिवहन, खानपान और अन्य स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
नागपुर के बाद अब अमरावती बनेगा विदर्भ का नया एविएशन हब?
अमरावती में एयर इंडिया की इस एकेडमी की स्थापना से विदर्भ को राष्ट्रीय विमानन मानचित्र पर नई पहचान मिलने की संभावना है। अब तक कमर्शियल पायलट बनने के इच्छुक युवाओं को प्रशिक्षण के लिए दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करना पड़ता था। इस केंद्र के शुरू होने से महाराष्ट्र सहित देशभर के युवाओं को अमरावती में ही आधुनिक विमानन प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
DGCA की मंजूरी मिलने के बाद अब सभी की नजरें एकेडमी के औपचारिक शुभारंभ और पहले बैच के प्रशिक्षण पर टिकी हैं। यह परियोजना अमरावती के लिए शिक्षा, रोजगार, निवेश और विमानन क्षेत्र में विकास के नए अवसर खोल सकती है।
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