logo_banner
Breaking
  • ⁕ Shardiya Navratri 2026: नागपुर सहित विदर्भ में नवरात्रि की धूम, देवी मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ⁕
  • ⁕ महाराष्ट्र में जल संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, राज्य के सभी जलस्रोतों का पानी पीने के लिए किया आरक्षित ⁕
  • ⁕ संवैधनिक संस्थाओ के खिलाफ अविश्वास पैदा करना चाहता है विपक्ष, मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- देश में वामपंथी शासन लाना चाहते हैं राहुल गांधी ⁕
  • ⁕ देऊळगांव राजा में दो गुटों में खूनी संघर्ष, नगरसेवक समेत दो की मौत; पुलिस स्टेशन के सामने हुआ बवाल ⁕
  • ⁕ मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे में मतभेद! विजय वडेट्टीवार ने किया बड़ा दावा, मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस नेता को दी सधी हुई सलाह ⁕
  • ⁕ त्योहारों पर नागपुर और न्यू अमरावती के यात्रियों को बड़ी राहत, मध्य रेलवे चलाएगा विशेष ट्रेनें ⁕
  • ⁕ Chandrapur: चंद्रपुर का राजा’ गणेश मंडल पर रामनगर पुलिस थाने में FIR ⁕
  • ⁕ Amravati: अमरावती में शिवसेना यूबीटी ने निकाला मार्च, कर्जमाफी सहित 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद देने की मांग ⁕
  • ⁕ Yavatmal: वणी में भीषण सड़क हादसा, बाइक सवार 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत ⁕
  • ⁕ Nagpur: ड्यूटी पूरी कर घर पहुंचे ASI रविंद्र कोकांडे की अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत ⁕
Amravati

शिवसेना मामले पर बच्चू कडू ने दी प्रतिक्रिया, कहा- सीएम शिंदे की पूरी तैयारी, पक्ष में आएगा फैसला


अमरावती: मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट शिवसेना का अधिकार किसका इसको लेकर सुनवाई करने वाला है। इसको लेकर शिवसेना के दोनों धड़े अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। इसी को लेकर प्रहार प्रमुख बच्चू कडु ने बड़ी बात कही है। सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कडु ने कहा कि, “मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पूरी तैयारी की हुई है। अगर कानून के दायरे में बैठना सुविधाजनक होगा तो कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में होगा।”

बच्चू कडू ने कहा, "जिसके पास वोट है वह चुनाव चिह्न से अधिक महत्वपूर्ण है। मैंने पांच अलग-अलग सिंबल पर चुनाव लड़ा था। मुझे पतंग, हवाई जहाज, नारियल और प्याले जैसे अलग-अलग प्रतीक मिले। लेकिन अंत में वह व्यक्ति ही है जो मायने रखता है। किसी के मार्क्स आने से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन लोग सोचते हैं कि हमें इन संकेतों को पूरा करना चाहिए।"

कडु ने आगे कहा, "एकनाथ शिंदे ने मजबूत तैयारी की है। उनके पास पूरे दस्तावेज हैं। अदालतें भावनाओं पर फैसला नहीं करतीं। ये फैसले कागज पर लिए जाते हैं। क्योंकि हम कागज को महत्व देते हैं। अगर मैं कल कोर्ट जाकर लड़ूंगा तो फैसला मेरे पक्ष में नहीं होगा। आपके पास क्या कागजात हैं? क्या वे कानून के दायरे में फिट बैठते हैं? यह कोर्ट देखता है। यदि दस्तावेज़ कानून के दायरे में फिट होने के लिए तैयार किए जाते हैं, तो निर्णय निश्चित रूप से उनके पक्ष में होगा।"