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Amravati

मवेशी बाजार अगले आदेश तक बंद, 3 तहसीलों के 12 गांवों में लंपी रोग फैला


  • अब तक 314 जानवर संक्रमित

अमरावती. जिले के तीन तालुकों के 12 गांवों में लंपी रोग का प्रसार सामने आया है. जिले में धारणी के झिल्पी व पडिदाम के जानवरों में सबसे पहले 31 अगस्त को जानवरों में इस बीमारी के फैलने का पता चला था. वहां 20 जानवर संक्रमित पाए गए. अब तक तीन तहसीलों के बारह गांवों में पशुओं में इस बीमारी का पता चला है. अचलपुर के धामनगांव गढ़ी, वडगांव फतेपुर समेत धारणी के झिल्पी, पडिदाम, सावलखेड़, सोनबर्डी, बाबंदा, धाराकोट, धूलघाट रोड, हिराबंबई, चिखलदरा तहसील के अंबापाटी व पिपादरी में अब तक 314 जानवर लंपी रोग के संक्रमित पाए गए हैं. इस क्षेत्र के सभी जानवरों का टीकाकरण किया जा रहा है और जिले में सभी पशु बाजार को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है. मवेशियों की अंतर्राज्यीय और अंतर जिला आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है.

14 रैपिड एक्शन दलों का गठन


राज्य के जलगांव, अहमदनगर, अकोला, पुणे, धुले, लातूर, औरंगाबाद, बीड, सातारा, बुलडाना, उस्मानाबाद, सांगली, सोलापुर के साथ-साथ अमरावती जिले में पशुओं में लंपी त्वचा रोग का संक्रमण फैला है. पुणे के पशु रोग जांच विभाग के संयुक्त आयुक्त से वैसी रिपोर्ट जिला प्रशासन को मिली है. इसलिए गोजातीय पशुओं के अंतर-राज्यीय और अंतर-जिला परिवहन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. सभी प्रभावित क्षेत्रों को नियंत्रित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है. संबंधित आदेश कलेक्टर पवनीत कौर ने जारी किए.  गोजातीय प्रजातियों के सभी मवेशियों और भैंसों को किसी अन्य स्थान पर लाने-ले जाने पर भी रोंक लगाई गई है.  मवेशियों और भैंसों के किसी भी पशु बाजार को आयोजित करना, पशु दौड़ आयोजित करना, पशु मेले आयोजित करना, पशु प्रदर्शनियों का आयोजन करना और नियंत्रित क्षेत्रों में गोजातीय जानवरों को समूहबद्ध करके या किसी भी कार्यक्रम के आयोजन प्रतिबंधित किए गए है. जिले में मवेशी बाजार अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिए गए हैं. बीमारी की रोकथाम के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है और उन्हें तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं. जिले में लंपी प्रतिबंध के लिए प्रत्येक तालुक में एक ऐसे 14 रैपिड एक्शन दलों का गठन किया गया है. ऐसी जानकारी उपजिलाधीश डॉ.विवेक घोडके ने दी. इस अवसर पर पशुपालन उपायुक्त डॉ. संजय कावरे, जिला पशुपालन अधिकारी पुरुषोत्तम सोलंकी, पशुधन विकास अधिकारी डॉ. उदय देशमुख और डॉ. रमेश राउत उपस्थित थे.

3 मवेशियों की मौत


पशुपालन उपायुक्त डॉ. कावरे ने बताया कि इस बीमारी की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका से हुई थी. भारत में इस बीमारी का पहला मामला 2013 में उड़ीसा में पाया गया था. 2019-20 में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में इसका प्रकोप पाया गया था. महाराष्ट्र में इस साल 4 अगस्त को जलगांव जिले के पशुओं में इस बीमारी का प्रकोप देखा गया. मेलघाट में कुछ स्थानों पर इस रोग को देवी का रोग मानने के कारण तत्काल उपचार के अभाव में तीन पशुओं की मौत हो गई है. इसलिए क्षेत्र में तेजी से टीकाकरण कर रहे हैं और जन जागरूकता के लिए चरवाहों तक पहुंच रहे हैं. इन गांवों के बीच 5 किमी. आसपास के सभी जानवरों का टीकाकरण किया जा रहा है. इस क्षेत्र में करीब 25 हजार जानवर हैं और उन्हें टीका लगाने के लिए 30 हजार मात्रा में गोट फॉक्स के टीके उपलब्ध कराया गए है. अब तक छह हजार पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है.