logo_banner
Breaking
  • ⁕ Yavatmal: ACB की बड़ी करवाई, रिश्वत लेते दो अधिकारी गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ Amravati: अमरावती में दो धारदार तलवारें लेकर दहशत फैलाने वाले शख्स को पुलिस ने दबोचा ⁕
  • ⁕ Gondia: उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय अजित पवार के अस्थि कलश का गोंदिया में भावुक दर्शन, कोरणी घाट पर होगा अस्थि विसर्जन ⁕
  • ⁕ Bhandara:कांग्रेस को झटका, ओबीसी जिलाध्यक्ष शंकर राऊत ने भाजपा में किया प्रवेश ⁕
  • ⁕ Bhandara: किसानों का पटाखा फोड़ आंदोलन, धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाने की मांग ⁕
  • ⁕ नई दिल्ली में दिवंगत अजित पवार की श्रद्धांजली सभा, सांसद प्रफुल्ल पटेल ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ में जल्दबाजी को लेकर दिया जवाब ⁕
  • ⁕ मनपा के अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को लेकर कांग्रेस आक्रामक; मनपा के बाहर किया जोरदार आंदोलन, एक तरफा कार्रवाई का लगाया आरोप ⁕
  • ⁕ Akola: खुदको आईबी अधिकारी बताकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में घुसपैठ करने वाले आरोपी को तीन दिन की पुलिस हिरासत ⁕
  • ⁕ Yavatmal: मुलावा फाटा-सावरगाव रोड पर रोंगटे खड़े करने वाला हादसा, युवक का सिर 12 किमी तक टैंकर में रहा फंसा ⁕
  • ⁕ Amravati: वलगाव में खेत में किसान के साथ अज्ञात लोगों ने की मारपीट, डॉक्टरों की लापरवाही से किसान की मौत होने का आरोप ⁕
Amravati

Amravati: महाराष्ट्र का पहला किसान पुत्र जिसने खेत में बनाया मां का मंदिर


अमरावती: जिले में एक किसान के बेटे ने अपने खेत में अपनी मां का मंदिर बनवाया है, इस भावना के साथ कि उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहे, उनका साथ हर पल मिलता रहे। इस किसान के बेटे का नाम है रवींद्र मेटकर। आज भले ही उनके पोल्ट्री व्यवसाय का टर्नओवर करोड़ों रुपये में है, लेकिन कभी-कभी उन्हें पैसों के लिए संघर्ष करना पड़ता था।

उनकी मां सुमनताई का मायका चंदुरबाजार तहसील के शिराजगांव बंड से है। उन्हें चार एकड़ पैतृक जमीन विरासत में मिली। इसे 20,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से बेचा गया और उसी पैसे से 1998 में अमरावती के पास अंजनगांवबारी शिवार में एक एकड़ जमीन खरीदी गई। तो बैंक ने लोन दिया और 4000 पक्षियों के जरिए इस क्षेत्र में पोल्ट्री व्यवसाय की नींव रखी गई। प्रारंभ में आर्थिक प्रगति धीमी थी।

व्यवसाय का विस्तार चरणों में किया गया। आज का अंडा उत्पादन 95 हजार से 1 लाख है। लेकिन यह सब वैभव देखने से पहले ही 21 अगस्त 2006 को सुमन मेटकर का निधन हो गया। उनकी हमेशा इस किसान के बेटे को आती रहती है। मंदिर उन यादों को साकार करने वाली जगह है। मेटकर ने पोल्ट्री फार्म का नाम 'मातोश्री' रखा।

मेटकर ने कहा कि आज हम करोड़ों रुपए का कारोबार कर रहे हैं। मंदिर तो बन गया लेकिन माँ आज यह गौरव नहीं देख सकीं।