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Buldhana

अमोल मिटकरी ने शिंदे गुट और भाजपा विधायकों को दी बहस की चेतावनी, कहा- जो हारेगा देगा विधायक पद से इस्तीफा 


बुलढाणा: महापुरुषों पर गलत बयानबाजी को लेकर शिंदे -फडणवीस सरकार और महाविकास अघाड़ी आमने सामने हैं। दोनों तरफ के नेता एक दूसरे पर महापुरुषो का अपमान करने का आरोप लगातर हमला बोल रहे हैं। इसी बीच संभाजी महाराज पर नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने बयान पर बवाल मचा गया है ,भाजपा समेत सत्ता पक्ष लगातार  उनपर हमलावर है। वहीं इस मामले पर एनसीपी नेता अमोल मिटकरी ने पलटवार किया है। मिटकरी ने बहस की चुनौती देते हुए कहा कि, संभाजी महाराज धर्मवीर थे की नहीं इसपर बहस हो जाए। जो हारेगा वह अपने विधायक पद से इस्तीफा देगा।

एनसीपी के बुलढाणा तहसील अध्यक्ष दत्तात्रय लहाणे ने महापुरुष सम्मान यात्रा आयोजित की थी। इस यात्रा में शामिल होने मिटकरी देउलघाट (बुलढाणा) पहुंचे थे। इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए एनसीपी विधायक ने कहा, “भाजपा और ऐसे ही अन्य संगठन छत्रपति संभाजी महाराज को धर्म नायक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। महापुरुषों का अपमान करने वालों को संभाजी राजाओं के खिलाफ बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”

उन्होंने कहा, “आजकल राजनीतिक नेताओं को धर्मवीर की उपाधि दी जाती है। चूंकि छत्रपति संभाजी महाराज एक धार्मिक नायक थे, इसलिए शिंदे समूह के विधायक उनसे अपनी तुलना करने की सख्त कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा बुलढाणा विधायक संजय गायकवाड़ भी खुद को धार्मिक नायक बताते हैं।”

एनसीपी नेता अजीत पवार के संबंध में एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष को अजीत दादा की आलोचना करने का बिल्कुल अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अजीत दादा की ओर इशारा करना सूरज पर थूकने जैसा है। करणी सेना के विजय सेंगर की आलोचना करते हुए मिटकरी ने पूछा कि क्या उन्हें 1818 की लड़ाई के बारे में पता भी है।