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Buldhana

Buldhana: मिसाळवाडी में बादल फटने से भारी तबाही, इंसानी जंजीर बनाकर बचाई गई मासूमों और किसानों की जान!


बुलढाणा: बुलढाणा जिले के चिखली तहसील अंतर्गत आने वाले मिसाळवाडी परिसर में बादल फटने (ढगफुटी) के कारण भीषण बाढ़ ने तबाही मचाई है। भारी बारिश के चलते स्थानीय नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे मिसाळवाडी गांव का तहसील मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। मुख्य पुल के ऊपर से तेज रफ्तार में बाढ़ का पानी बहने के कारण ग्रामीणों और राहगीरों के लिए बेहद खतरनाक स्थिति पैदा हो गई। इस संकट की घड़ी में प्रशासन का इंतजार करने के बजाय गांव के युवाओं और उपसरपंच ने मिलकर जो हौसला दिखाया, उसने एक बड़े हादसे को टाल दिया।

जब देवदूत बने ग्रामीण: बनाई 'मानवी साखली'
बाढ़ के पानी का बहाव इतना तेज था कि पुल के दूसरी तरफ कई स्कूली छात्र, महिलाएं और अपनी फसलों को देखने गए किसान फंस गए थे। पानी लगातार बढ़ रहा था और जान का खतरा मंडरा रहा था। ऐसे में उपसरपंच हनुमान मिसाळ के मार्गदर्शन में ग्रामीणों ने तत्काल मोर्चा संभाला।

गांव के युवाओं ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर पानी के तेज बहाव के बीच एक मजबूत मानवी साखली (Human Chain) बनाई। ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर पुल के उस पार फंसे सभी विद्यार्थियों, महिलाओं और किसानों को एक-एक करके सुरक्षित बाहर निकाला। ग्रामीणों के इस त्वरित सूझबूझ और अदम्य साहस की हर तरफ सराहना हो रही है।

हर साल का यही दर्द: "पुल की ऊंचाई बढ़ाओ"
इस आपदा ने प्रशासनिक लापरवाही को भी एक बार फिर उजागर कर दिया है। गुस्साए ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है; हर साल मानसून के दिनों में इस पुल के ऊपर से पानी बहता है, जिससे पूरा गांव टापू बन जाता है और लोगों की जान आफत में पड़ जाती है। ग्रामीणों ने कहा, "प्रशासन हर साल हमारी जान से खिलवाड़ देखना बंद करे। इस पुल की ऊंचाई को तुरंत बढ़ाया जाए और यहां एक ऊंचे व मजबूत पुल का निर्माण कर हमें इस स्थाई समस्या से मुक्ति दिलाई जाए।"