कुदरत का करिश्मा! अजंता पर्वत श्रृंखला में मिला 'गारगोटियों का पहाड़'; बुलढाणा के लाखनवाड़ा में अद्भुत भौगोलिक आश्चर्य
बुलढाणा: प्रकृति के कई चमत्कार और भूगर्भ में होने वाले बदलाव इंसानों को हमेशा हैरत में डालते रहे हैं। ऐसा ही एक अद्भुत प्राकृतिक चमत्कार इन दिनों बुलढाणा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले से गुजरने वाली अजंता पर्वत श्रृंखला (Ajanta Mountain Range) के एक हिस्से में 'गारगोटियों (Chकमक पत्थरों) का पहाड़' देखने को मिल रहा है, जो स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए भारी कौतूहल का केंद्र बन गया है।
पहाड़ पर बिखरी सफेद पत्थरों की चादर!
खामगांव तालुका के लाखनवाड़ा इलाके में अजंता पहाड़ियों के एक विशिष्ट हिस्से पर गारगोटी नामक पत्थर बहुत बड़ी मात्रा में बिखरे पड़े हैं। दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो पहाड़ की चोटी पर सफेद चमकीले पत्थरों की कोई चादर बिछा दी गई हो।
इस जगह का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि यदि पहाड़ के इस हिस्से पर थोड़ी खुदाई करके देखा जाए, तो जमीन के भीतर ये पत्थर बिल्कुल नहीं मिलते; ये केवल ऊपरी सतह पर ही मौजूद हैं। इसके अलावा, पहाड़ के इस खास दायरे को छोड़कर आसपास की अन्य पहाड़ियों पर दूर-दूर तक एक भी गारगोटी नजर नहीं आती। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि केवल इसी स्थान पर इतनी भारी मात्रा में ये पत्थर कहां से आए?
क्या है इस गारगोटी (चकमक) का महत्व?
गारगोटी वास्तव में एक बेहद कठोर और चमकीला पत्थर होता है। प्राचीन समय में, जब माचिस या लाइटर का आविष्कार नहीं हुआ था, तब जंगलों में या घरों में आग जलाने के लिए इन पत्थरों को आपस में टकराया जाता था, जिससे चिंगारी निकलती थी। ग्रामीण भाषा में इसे 'चकमक का पत्थर' कहा जाता है। आज भी जंगलों में रहने वाले या खानाबदोश समूह आग पैदा करने के लिए इसी पारंपरिक तरीके का इस्तेमाल करते हैं।
गौरतलब है कि अजंता-एलोरा जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर इस तरह के चमकदार पत्थरों और क्रिस्टल्स (स्फटिक) को देखने के लिए विदेशी पर्यटक काफी आकर्षित होते हैं और वहां इनकी अच्छी-खासी बिक्री भी होती है।
भूवैज्ञानिकों से रिसर्च की मांग
लाखनवाड़ा के इस पहाड़ पर अचानक और केवल ऊपरी सतह पर इतनी बड़ी संख्या में मिले इन पत्थरों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। क्या यह किसी प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोट का हिस्सा है या किसी अन्य भूगर्भीय हलचल का परिणाम? इसका सही वैज्ञानिक कारण जानने के लिए भूवैज्ञानिकों (Geologists) को इस स्थान का दौरा कर गहन शोध (रिसर्च) करना चाहिए, ऐसी मांग अब स्थानीय ग्रामीणों द्वारा जोर-शोर से उठाई जा रही है।
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