logo_banner
Breaking
  • ⁕ Shardiya Navratri 2026: नागपुर सहित विदर्भ में नवरात्रि की धूम, देवी मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ⁕
  • ⁕ महाराष्ट्र में जल संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, राज्य के सभी जलस्रोतों का पानी पीने के लिए किया आरक्षित ⁕
  • ⁕ संवैधनिक संस्थाओ के खिलाफ अविश्वास पैदा करना चाहता है विपक्ष, मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- देश में वामपंथी शासन लाना चाहते हैं राहुल गांधी ⁕
  • ⁕ देऊळगांव राजा में दो गुटों में खूनी संघर्ष, नगरसेवक समेत दो की मौत; पुलिस स्टेशन के सामने हुआ बवाल ⁕
  • ⁕ मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे में मतभेद! विजय वडेट्टीवार ने किया बड़ा दावा, मंत्री जायसवाल ने कांग्रेस नेता को दी सधी हुई सलाह ⁕
  • ⁕ Chandrapur: चंद्रपुर में बंद, खराब पुलिस चौकियों को मिलेगी नई ज़िंदगी! पुलिस प्रशासन का निर्णय ⁕
  • ⁕ Chandrapur: चंद्रपुर का राजा’ गणेश मंडल पर रामनगर पुलिस थाने में FIR ⁕
  • ⁕ Amravati: अमरावती में शिवसेना यूबीटी ने निकाला मार्च, कर्जमाफी सहित 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद देने की मांग ⁕
  • ⁕ Yavatmal: वणी में भीषण सड़क हादसा, बाइक सवार 60 वर्षीय व्यक्ति की मौत ⁕
  • ⁕ Nagpur: ड्यूटी पूरी कर घर पहुंचे ASI रविंद्र कोकांडे की अचानक बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत ⁕
Buldhana

Buldhana: एक हफ्ते में कैसे पूरा होगा सर्वेक्षण, अधिकारीयों को लगाना पड़ रहा एड़ी छोटी का जोर


बुलढाणा: जिले में 23 जनवरी से मराठा आरक्षण का सर्वेक्षण शुरू हो गया है। जिला प्रशासन को एक हफ्ते के अंदर जिले के 1400 गांव में जाकर 6 लाख 58 हजार 60 घरों तक पहुंचना है। हालांकि, अधिकारीयों के लिए यह टेडी खीर साबित हो रही है। 

महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने राज्य के मराठा और खुली श्रेणी के नागरिकों का आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है। तदनुसार, बुलढाणा जिले में मंगलवार से वास्तविक सर्वेक्षण शुरू हो गया है, जिसका बड़ा विस्तार और मराठा कुनबी समुदाय की एक बड़ी संख्या है। इसके लिए विस्तार अधिकारी, सर्कल अधिकारी श्रेणी में 400 पर्यवेक्षक और शिक्षक, तलाठी, ग्राम सेवक, कृषि सहायक श्रेणी में 5 हजार 340 प्रगणक नियुक्त किये गये हैं। उनकी ट्रेनिंग 20 से 22 के बीच पूरी हो गई. आयोग के 'मास्टर ट्रेनर्स' द्वारा जिले के 34 प्रशिक्षकों को सर्वेक्षण प्रशिक्षण दिया गया। बाद में 34 व्यक्तियों ने 5830 पर्यवेक्षकों और प्रगणकों को प्रशिक्षित किया। इसके बाद आज से वास्तविक सर्वे शुरू हो गया है.

जिले के 13 तहसील में 1420 गांवों तक अपर्याप्त संख्या में कर्मचारियों को पहुंचना होगा। उन्हें जिले के 6 लाख 58 हजार 60 घरों में जाकर सर्वे करना होगा. इसके लिए अल्पावधि को ध्यान में रखते हुए उन्हें कड़ी मेहनत करनी होगी और करनी होगी। इस उद्देश्य के लिए एक 'ऐप' विकसित किया गया है। कर्मचारियों से 182 सवाल पूछे जाएंगे और कुछ श्रेणियों के नागरिकों को उनका जवाब देना होगा। कर्मचारियों को यह जानकारी अपने मोबाइल फोन पर लेनी (नोट) करनी होगी। वहां से इस जानकारी को 'एप' पर डालना (अपलोड) करना होगा।

इस बीच दूरदराज के इलाकों में 'मोबाइल नेटवर्क' एक अतिरिक्त समस्या हो सकती है. वहीं बड़ी संख्या में घर और 29 लाख की आबादी और कर्मचारियों की अपर्याप्त संख्या मुख्य समस्या है. इसके अलावा कर्मचारियों का नियमित कामकाज पहले दिन से ही प्रभावित हो गया है. अधिकांश स्कूलों में चल रहा स्नेह सम्मेलन, 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) कार्यक्रम की तैयारियां, आगामी परीक्षाएं, पाठ्यक्रम शिक्षकों और प्राचार्यों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। इसके चलते पहले ही दिन सर्वे का समय चूकने की चर्चा शुरू हो गई है। कम अवधि और समय के कारण, कर्मचारियों को अनियमित समय पर घर-घर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस समय परिवार का मुखिया या पुरुष घर पर नहीं होंगे।