logo_banner
Breaking
  • ⁕ 2013 यौन उत्पीड़न मामला: तरुण तेजपाल दोषी करार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा ⁕
  • ⁕ चंद्रपुर महापालिका में बदलते सियासी समीकरण, मुनगंटीवार समर्थक महापौर को वडेट्टीवार खेमे का सहारा ⁕
  • ⁕ 7 करोड़ 68 लाख की ठगी का पर्दाफाश, महिलाओं को कर्ज का झांसा देकर करोड़ों का खेल; मास्टरमाइंड मंदा गुमगावकर गिरफ्तार ⁕
  • ⁕ एलोपैथी अभ्यास की अनुमति के खिलाफ डॉक्टरों का आंदोलन, मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रही है सरकार ⁕
  • ⁕ यातायात पुलिस का 'गांधीगिरी' पैटर्न! अकोला में हेलमेट पहनने वालों का गुलाब देकर स्वागत, तो नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई ⁕
  • ⁕ नागपुर में SIR अभियान से हड़कंप, मतदाता सूची से हटने जा रहे करीब 6 लाख नाम! ⁕
  • ⁕ रामटेक में हिट एंड रन, तेज रफ्तार कार ने बाइक को मारी टक्कर; नवविवाहित युवक की मौत, दूसरा गंभीर ⁕
  • ⁕ विदर्भ सहित राज्य के 247 नगर परिषदों और 147 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित, देखें किस सीट पर किस वर्ग का होगा अध्यक्ष ⁕
  • ⁕ अमरावती में युवा कांग्रेस का ‘आई लव आंबेडकर’ अभियान, भूषण गवई पर हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ⁕
  • ⁕ Gondia: कुंभारटोली निवासियों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नगर परिषद पर बोला हमला, ‘एक नारी सबसे भारी’ के नारों से गूंज उठा आमगांव शहर ⁕
Buldhana

Buldhana : सोनबर्डी स्कूल में तीन साल से बिजली नहीं, छात्र हैंडपंप का पानी पीने को मजबूर


बुलढाणा: जिले के सोनबर्डी जिला परिषद स्कूल की बदहाल स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पिछले तीन वर्षों से स्कूल में बिजली की आपूर्ति बाधित है, जिससे वाटर फिल्टर, एलईडी स्क्रीन और कंप्यूटर महज शोपीस बनकर रह गए हैं। स्कूल परिसर में पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है, जिससे छात्र गांव के हैंडपंप से पानी पीने को मजबूर हैं।

बरसात के मौसम में छात्रों को टपकती छत और कमजोर दीवारों के बीच बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में रहती है। शौचालय तक नहीं: स्कूल में छात्रों के लिए शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत हर स्कूल में बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए। लेकिन सोनबर्डी स्कूल की दुर्दशा से साफ है कि इस कानून की अनदेखी की जा रही है।

हर साल सरकार छात्रों की शिक्षा के लिए लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में मराठी स्कूलों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। ऐसे में शिक्षा के लिए मिलने वाला फंड कहां और कैसे खर्च किया जा रहा है? यह एक बड़ा सवाल बन गया है।