नक्सलियों की खुली चुनौती: 'फिनिक्स' पक्षी की तरह फिर लेंगे उड़ान; सुरक्षा तंत्र में मचा हड़कंप
गडचिरोली: केंद्र सरकार जहां एक ओर 'नक्सल मुक्त भारत' का सपना देख रही है और नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या कम होने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर नक्सली संगठन की उत्तर तालमेल कमेटी (NCC) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार को सीधी चुनौती दी है। नक्सलियों ने कहा है कि जिस तरह 1990 के दशक में बड़े झटके के बाद उन्होंने 'फिनिक्स' पक्षी की तरह वापसी की थी, उसी तरह वे एक बार फिर पुनर्जीवित होंगे।
'देवजी' की घर वापसी से बौखलाया संगठन
नक्सली संगठन के पूर्व सर्वोच्च नेता 'देवजी' द्वारा मुख्यधारा में शामिल होने के फैसले ने संगठन की जड़ों को हिला दिया है। इसी बौखलाहट में तेलंगाना की उत्तर तालमेल कमेटी ने पत्रक जारी कर अपनी भड़ास निकाली है। संगठन ने देवजी को 'गद्दार' और 'दुश्मन का एजेंट' करार देते हुए लोकतांत्रिक मार्ग को सिरे से खारिज कर दिया है।
सशस्त्र क्रांति का ही अट्टाहास
17 अप्रैल को जारी इस पत्रक में नक्सलियों ने अपनी विचारधारा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है:
- सशस्त्र संघर्ष ही मार्ग: संगठन का दावा है कि मार्क्स-लेनिन-माओ विचारधारा पर आधारित सशस्त्र संघर्ष ही क्रांति का एकमात्र रास्ता है।
- लोकतंत्र का विरोध: नक्सलियों का कहना है कि भूमिगत पार्टी को कानूनी दायरे में लाना आंदोलन का अंत है। उन्होंने देवजी के साथ-साथ कोबाड और वेणुगोपाल पर भी तीखे प्रहार किए हैं।
- नेपाल का उदाहरण: पत्रक में नेपाल के कम्युनिस्ट आंदोलन का हवाला देते हुए कहा गया है कि वहां के नेता मूल विचारधारा से भटक गए, लेकिन भारत में ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
शहीदों की दुहाई और 'विघटनवाद' का आरोप
नक्सलियों ने चारु मुजुमदार, बसवाराजू, राजू दा और हिडमा जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्होंने प्राणों की आहुति दी पर समझौता नहीं किया। उनके अनुसार, देवजी जैसे लोगों द्वारा आत्मसमर्पण करना 'विघटनवाद' है, जिससे क्रांतिकारी आंदोलन कमजोर नहीं होगा।
गडचिरोली में 'हाई अलर्ट'
नक्सलियों के इस धमकी भरे पत्रक के बाद गडचिरोली पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गई है। जिले में 'हाई अलर्ट' जारी कर दिया गया है।
- गश्त तेज: तेलंगाना और छत्तीसगढ़ सीमा से सटे अहेरी, सिरोंचा और भामरागड तालुकों में सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ा दी गई है।
- सुरक्षा बलों की तैयारी: पुलिस सूत्रों के अनुसार, नक्सलियों की किसी भी कायराना हरकत का जवाब देने के लिए सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस दल पूरी तरह मुस्तैद हैं।
अस्तित्व बचाने नक्सलियों का 'प्रचार युद्ध'
यह पत्रक ऐसे समय में आया है जब नक्सल मूवमेंट अपने सबसे मुश्किल समय से जूझ रहा है। संगठन के तमाम बड़े नेता या तो आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिन्होंने नहीं किया वह एनकाउंटर में मारे जा चुके है। वहीं संगठन के अंदर बढ़ते आंतरिक कलह और मुस्किले बढ़ गई है। सुरक्षा विशेषज्ञ इसे संगठन का अस्तित्व बचाने के लिए किया गया 'प्रचार युद्ध' (Propaganda War) मान रहे हैं।
admin
News Admin