Gondia: रायपुर-तिरोड़ा बिजली लाइन को मंजूरी से पहले ही विरोध, 5,152 पेड़ों पर चलेगी कुल्हाड़ी!
नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व के संवेदनशील वन क्षेत्र से गुजरेगी 400 केवी बिजली लाइन, बाघों के कॉरिडोर और किसानों की जमीन को लेकर बढ़ी चिंता।
गोंदिया: रायपुर से महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के तिरोड़ा तक बिछाई जाने वाली 400 केवी की हाई-वोल्टेज बिजली लाइन का प्रोजेक्ट विवादों में घिरता नजर आ रहा है। इस परियोजना के लिए नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व के करीब 5 हजार 152 पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव है। खास बात यह है कि बिजली लाइन का मार्ग बाघों के महत्वपूर्ण आवागमन क्षेत्र से होकर गुजरने वाला है।
ऐसे में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके स्वतंत्र विचरण पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, बिजली लाइन के रास्ते में आने वाली किसानों की जमीन और फसलों के नुकसान की भरपाई का मुद्दा भी उठने लगा है। परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने से पहले ही किसान और वन्यजीव प्रेमी इसका विरोध कर रहे हैं।
अदाणी पावर लिमिटेड के रायपुर टीपीपी सबस्टेशन से गोंदिया जिले के तिरोड़ा सबस्टेशन तक 400 केवी क्षमता की बिजली लाइन बिछाई जानी है। हालांकि, इस लाइन का प्रस्तावित मार्ग नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व के संवेदनशील वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसके लिए करीब 136 हेक्टेयर वन भूमि में मौजूद 5 हजार 152 पेड़ों की कटाई करनी पड़ सकती है।
यह क्षेत्र केवल जंगल ही नहीं, बल्कि बाघों के आवागमन का एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर भी है। यह वन क्षेत्र महाराष्ट्र के नवेगांव-नागझिरा और पेंच, मध्य प्रदेश के कान्हा तथा छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाले वन्यजीव मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होने से बाघों समेत अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव को महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव मंडल से मंजूरी मिल चुकी है। अब अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्ताव केंद्रीय वन्यजीव मंडल के पास भेजा गया है। यानी परियोजना की अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया अभी बाकी है। इसके बावजूद पर्यावरणीय प्रभाव, वन्यजीवों के संरक्षण और किसानों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं।
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