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Maharashtra

मेथेनॉल कंपनी को राहत से सियासी विवाद! तुकाराम मुंढे की कार्रवाई पर मंत्री नरहरि झिरवाल की रोक


पुणे: महाराष्ट्र में FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे की कार्रवाई को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। पुणे के रांजणगांव स्थित मेथेनॉल कंपनी पर FDA की ओर से की गई कार्रवाई को खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाल ने स्थगित कर दिया है। जहरीली शराब मामले के बाद की गई इस कार्रवाई पर रोक लगाए जाने से कई सवाल उठ रहे हैं। वहीं, कंपनी का संबंध राष्ट्रवादी कांग्रेस के एक नेता से होने का आरोप भी लगाया जा रहा है।

महाराष्ट्र में FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने जब से विभाग की कमान संभाली है, तब से राज्यभर में मिलावट और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर कार्रवाई तेज हुई है। आम लोगों के बीच उनके काम की सराहना हो रही है, वहीं कुछ लोगों और कंपनियों के लिए उनकी कार्रवाई परेशानी का कारण बनी हुई है। मुंढे के विभाग में शिकायत मिलने पर संबंधित लोगों और कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

इसी बीच तुकाराम मुंढे के तबादले की चर्चाएं भी तेज हुई थीं। सोशल मीडिया पर उनके राजस्थान तबादले के संदेश वायरल हुए। हालांकि, मुंढे ने स्पष्ट किया कि उनका महाराष्ट्र से बाहर तबादला नहीं हो सकता। मुंढे की कार्रवाई का असर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर भी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। गुड़ में मिलाए जाने वाले रंग पर रोक लगाने और जलेबी को उसके वास्तविक रंग में बेचने जैसे कदमों के साथ कई खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

लेकिन अब पुणे के रांजणगांव स्थित मेथेनॉल कंपनी पर की गई FDA की कार्रवाई को स्थगित किए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। पुणे में जहरीली शराब पीने से कुछ लोगों की मौत के मामले के बाद FDA ने इस कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। यह कार्रवाई तुकाराम मुंढे के विभाग की ओर से की गई थी, लेकिन खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाल ने इस पर रोक लगा दी।

इस स्थगन के पीछे राजनीतिक दबाव होने की चर्चा है। आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित कंपनी का संबंध राष्ट्रवादी कांग्रेस के एक नेता से है और इसी वजह से कार्रवाई पर रोक लगाई गई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि तुकाराम मुंढे के FDA की जिम्मेदारी संभालने के बाद विभाग को मिलने वाली शिकायतों में 557 प्रतिशत की वृद्धि होने का दावा किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मिलावट के खिलाफ कार्रवाई करने वाले विभाग के फैसले पर मंत्री की ओर से रोक लगाए जाने के पीछे आखिर क्या वजह है?