logo_banner
Breaking
  • ⁕ जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए 5 फरवरी को होगा का मतदान, 7 को मतगणना, दो चरणों में होगा चुनाव ⁕
  • ⁕ राज्य चुनाव आयोग ने ‘लाडली बहन योजना’ का लाभ अग्रिम रूप से देने पर लगाई रोक ⁕
  • ⁕ Nagpur: क्राइम ब्रांच की छापा मार कार्रवाई, साढ़े पाँच लाख का प्रतिबंधित गुटखा–तंबाकू जब्त ⁕
  • ⁕ Nagpur: नायलॉन मांजा पर हाईकोर्ट सख्त, पतंग उड़ाने पर 25,000 और बेचने पर 2.5 लाख रुपये का जुर्माना ⁕
  • ⁕ मनपा चुनाव के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार; सुरक्षा और तकनीकी इंतज़ाम पुख्ता, दोपहर तक परिणाम की संभावना ⁕
  • ⁕ मनपा चुनाव प्रचार का आज अंतिम दिन, रैलियों और जनसभाओं के ज़रिए प्रत्याशी झोंकेंगे पूरी ⁕
  • ⁕ प्रचार के अंतिम दिन भाजपा ने झोंकी पूरी ताक़त; फडणवीस निकाल रहे बाइक रैली, गडकरी और बावनकुले की जनसभाओं से मांगे जाएंगे वोट ⁕
  • ⁕ चांदी के भाव में उछाल का दौर जारी; नागपुर सराफा बाजार में 2,53,500 प्रति किलो पर पहुंची चांदी ⁕
  • ⁕ Bhandara: लाखोरी गांव के पास घूम रहे तीन भालू, इलाके में डर का माहौल ⁕
  • ⁕ Nagpur: नकली एमडी बिक्री विवाद में युवक पर जान लेवा हमला, चाकू मार कर किया गंभीर रूप से घायल ⁕
Nagpur

ब्लड बैंक ने मरीज का ब्लड ग्रुप ही बदल दिया


अकोला -क्या एक महीने में किसी का ब्लड ग्रुप बदल सकता।  नहीं ना,लेकिन अकोला में ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां ब्लड बैंक द्वारा दी गई गलत रिपोर्ट की वजह से एक व्यक्ति का ब्लड ग्रुप ही बदल गया। वह तो गनीमत रही कि परिजनों ने समय रहते ध्यान दे दिया जिस वजह से मरीज को गलत ब्लड चढ़ाने से रोक दिया गया.ब्लड बैंक द्वारा गलत रिपोर्ट दिए जाने के मामले में पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है।
 तेल्हारा तहसील के पंचगव्हाण निवासी वनमाला राहुल गवारगुरु द्वारा दर्ज की गई शिकायत के अनुसार, चंद्रकला बोदडे को 5 जुलाई को सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय डॉक्टर ने उसे बताया था कि उन्हें एनीमिया है। पिछले महीने डॉक्टर की सलाह पर उन्हें ब्लड दिया गया था। उस वक्त जब सरकारी ब्लड बैंक में मरीज के खून की जांच की गई तो उन्हें ए पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड देने को कहा गया था. जिसके अनुसार मरीज को एक पॉजिटिव ब्लड भी दिया गया। इसके बाद मरीज की हालत में थोड़ा सुधार हुआ। हालांकि, एक महीने के भीतर ही मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे 25 अगस्त को फिर से सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस बार भी मरीज को ब्लड की जरूरत थी।सरकारी ब्लड बैंक में मरीज के ब्लड सैंपल की जांच की गई। हालांकि इस बार ब्लड बैंक कर्मचारी ने मरीज का ब्लड ग्रुप 'एबी' पॉजिटिव बताया। वह तो गनीमत रही की परिजनों का ध्यान गया और मरीज को गलत ब्लड चढ़ाने से रोका गया। परिजनों ने आरोप लगते हुए कहा है की एक महीने के अंदर मरीज का ब्लड ग्रुप कैसे बदल गया। इस सन्दर्भ में पुलिस में शिकायत दर्ज की गयी है।