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Nagpur

Nagpur Central Jail: सेन्ट्रल जेल में मनाया गया झंडा दिवस, 120 कैदी अपने बच्चों से मिले


नागपुर: कारागृह ध्वजा दिन के अवसर पर गुरुवार को राज्य भर की जेलों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इसी के तहत नागपुर में गले मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन के तहत जेल में बंद ऐसे कैदी जिनके बच्चों की उम्र 16 वर्ष से कम है उन्हें उनसे मिलने का मौका दिया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से 120 कैदियों के 189 बच्चे सीधे उनके रिश्तेदारों से मिले। लगभग दो वर्ष बाद अपनों को अपने पास पाकर कैदी और उनके बच्चें दोनों की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। लंबे मिलन के बाद भावनाओं का गुबारा आँसुओ से बहने लगा। 

1 सितंबर को जेल झंडा दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर आज नागपुर सेंट्रल जेल में कारा विभाग द्वारा राज्य भर के कैदियों के बच्चों से मिलने के लिए `गलाभेट` की एक अभिनव गतिविधि आयोजित की गई। इस अवसर पर उप महानिरीक्षक जेल स्मिता साठे, जेल अधीक्षक अनूप कुमार कुमरे, वरिष्ठ जेल अधिकारी देवराव हाडे, वामन निमजे, जेल अधिकारी दीपक भोसले, माया धतूरे और जेल के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे.

झंडा दिवस 53 साल से मनाया जा रहा है


पूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाइक (पूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाइक) ने 1 सितंबर 1969 को जेल विभाग को झंडा भेंट किया। उस दिन से राज्य (महाराष्ट्र) में पहली बार जेल विभाग का झंडा दिवस हर जगह मनाया जा रहा है। कोरोना महामारी के संकट काल में कई बच्चे अपने माता-पिता से नहीं मिल पाए। हालांकि, इस साल जेल विभाग की इस अभिनव पहल के कारण कई लोग अपने माता-पिता से मिल पाए। इस मुलाकात की खुशी बच्चों के चेहरों पर साफ नजर आ रही थी। इस अवसर पर बंधुओं ने अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, धन और सुख की कामना की। जेल झंडा दिवस के अवसर पर आज सुबह 7.45 बजे जेल उप महानिरीक्षक स्वाति साठे द्वारा सेंट्रल जेल परिसर में ध्वजारोहण किया गया।


उस पल का अफसोस


कई बार गुस्से में आकर ऐसा कृत कर दिया जाता है जो नहीं करना चाहिए। उस कार्रवाई के परिणामों पर विचार नहीं किया जाता है। न ही यह विचार करता है कि इस क्रिया से परिवार पर पड़ने वाले प्रभाव और पीड़ा का क्या होगा। अगर मैं कार्रवाई के क्षण में रुक गया होता, तो आज मैं अपने परिवार के साथ होता। बच्चों को स्कूल छोड़ने जा सकता था, उनकी अच्छे से पढ़ाई हो सकती थी। कई कैदियों ने पाने परिजनों से मुलाकात के बाद उस पल को सोचकर पचता रहे हैं।