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Border Dispute: "हमारे संयम को कमजोरी न समझे", सीमा विवाद पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्ष को दिया जवाब


नागपुर: सीमा विवाद को लेकर शीतकालीन सत्र बेहद गरमाया हुआ है। विपक्षी दल इसको लेकर लगातार शिंदे-फडणवीस सरकार पर हमलावर है। अजित पवार, उद्धव ठाकरे सहित तमाम नेता इस मुद्दे पर सरकार पर घेरने में लगे हुए हैं। विपक्ष के इन हमलों पर मुख्यमंत्री शिंदे ने पलटवार किया है। बुधवार को विधान परिषद में बोलते हुए कहा कि, "आज वो लोग हमें ज्ञान दे रहे हैं, जिन्होंने इसको लेकर कुछ नहीं किया। हमने इसको लेकर डंडे खाये, जेल गए वहीं अब हमारे पुतले वहाँ जलाये गए फिर भी विपक्ष कह रहा हमने कुछ नहीं किया। हमारे संयम को कमजोरी न समझे। हमें उसी भाषा में जवाब देना आता है।"

आप के भरोसे को धन्यवाद

मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने सीमा क्षेत्र में भी संघर्ष किया। हम बेल्लारी जेल में भी कैद थे। उस समय कई लोगों ने विरोध किया था। कुछ को जेल भी हुई। तब से हम देखते हैं कि 66 साल में सभी पार्टियों ने कोशिश की है। लेकिन हमें कोई आपत्ति नहीं है अगर हर कोई हमसे 66 साल पुरानी इस समस्या को 6 महीने में हल करने की उम्मीद करता है।

उन्होंने कहा, "हम आपके द्वारा दिखाए गए भरोसे की सराहना करते हैं। चुनाव के समय राजनीति करते हैं। लेकिन अब मैं राजनीति बिल्कुल नहीं करना चाहता। हमें वाकई खुशी है कि आपने एक तरह से हमारी क्षमताओं पर विश्वास दिखाया है। हमारे पास ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने का अवसर है।"

बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे पर बोला हमला

बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे पर हमला बोलते हुए कहा, "जो लोग हमारे आंदोलन पर शक करने का काम कर रहे हैं। कुछ लोग कहते हैं कि हमें यह तब हुआ जब हमने लाठी खाई। मैं आज भी बालासाहेब की शिवसेना में हूं। मैं एक शिवसैनिक हूं। आज भी मेरे सिर में कोई मुख्यमंत्री नहीं है।" उन्होंने कहा, "जो लोग घर से बाहर नहीं निकले वो आज सड़कों पर आ गए। सड़क से सीढ़ियों तक आ गए हैं। यह हमारी जीत है।"

जनता की पीठ पर छुरा घोंपा

मुख्यमंत्री ने कहा, "कुछ लोग आते हैं और कुछ नया कहते हैं। कुछ तोते पिंजरे से बाहर आते हैं और शुरू हो जाते हैं। कुछ लोग सुबह साढ़े नौ बजे तक टीवी चालू नहीं करते हैं। लोग ऊब गए। बात हो रही है। बेशर्म सरकार वगैरह। अरे बेशर्मी की पराकाष्ठा पर पहुँच गए हो तुम। जिन लोगों ने आपको चुना है, उनकी पीठ में छुरा घोंपकर आप कांग्रेस-राष्ट्रवादी के साथ चले गए। बालासाहेब ठाकरे और मोदी की फोटो से वोट मांगे गए। तो सरकार किसके साथ आए? तो गलत कौन है? बेशर्मी किसने की? हमने सब कुछ खुलकर किया। कुछ भी छिपा नहीं है।"

शीशे के घर में रहने वाले दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते

शिंदे ने कहा, "जो कहा जाता है वह कहा जाता है। एक सहनशक्ति होती है। लेकिन हम पागलों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। मंत्री के जेल जाने पर भी आपने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। जो शीशे के घर में रहता है वो दूसरों के घर पर पत्थर नहीं फेंकता। आईने में रहने वालों को कपड़े बदलने की जरूरत नहीं पड़ी, बल्कि वे बदल गए।"