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Nagpur

वेंटिलेटर नहीं मिलने से वैष्णवी की हुई मौत के लिए,मेडिकल की व्यवस्था ज़िम्मेदार,समिति ने सौंपी रिपोर्ट


नागपुर-नागपुर के मेडिकल कॉलेज में 17 वर्षीय वैष्णवी की मृत्यु के मामले में डीन द्वारा गठित की गयी जाँच समिति ने अपनी जाँच रिपोर्ट सौंप दी है.रिपोर्ट में इस मृत्यु के लिए न ही किसी डॉक्टर,और न ही कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराया है.इसके लिए ठीकरा व्यवस्था पर फोड़ा गया है.सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रिपोर्ट में इस मौत के लिए अस्पताल की व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया गया है.यानि साफ है की घटना के लिए कोई दोषी नहीं है.यवतमाल के वणी की निवासी 17 वर्षीय वैष्णवी को मेडिकल में समय पर वेंटिलेटर नहीं मिलने के चलते मौत हो गयी थी.. बच्ची एक्स्ट्रा हेपेटिक पोर्टल वेन ऑब्स्ट्रक्शन नामक बेहद बीमारी से ग्रसित थी. 
इस घटना के बाद मेडिकल प्रशासन की हुई आलोचना के बाद डीन सुधीर गुप्ता ने सर्जरी विभाग के प्रोफ़ेसर डॉ ब्रजेश गुप्ता के नेतृत्व में समिति का गठन किया है.इस समिति द्वारा रिपोर्ट सौप दिए जाने की जानकारी है.बच्ची के माता पिता यवतमाल के अस्पताल से उसकी छुट्टी कारवां नागपुर के मेडिकल में लाये थे.क्यूंकि उन्हें यहाँ बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद थी.वैष्णवी इससे पहले भी दो बार मेडिकल में भर्ती रहकर ठीक हो चुकी थी.

मेडिकल पहुंचने के बाद उसे वार्ड नंबर 48 में रखा गया था.जहां उसे वेंटिलेटर नहीं मिला। डॉक्टरों से जो वेंटिलेटर उसे लगाया था वह समय पर चला ही नहीं। डॉक्टरों की सलाह पर  बच्ची के माता-पिता बेटी की जान को बचाने के लिए ‘सेल्फ-इन्फ्लेटिंग बॅग ( एम्बू बैग )के सहारे  लगातार उसे ऑक्सीजन दे रहे थे.मगर वो उसकी जान बचाने में असफल रहे. वैष्णवी की 16 सितंबर को मृत्यु हो गयी.

इस रिपोर्ट में बताया गया है की वरिष्ठ डॉक्टर ने न केवल बच्ची जाँच की बल्कि उसे योग्य उपचार भी दिया। लेकिन उसे जो सुविधा तुरंत में मिलनी थी वो नहीं मिली। रिपोर्ट में भविष्य में किये जाने वाले सुझाव भी दिए गए है.साथ ही यह भी कहां गया है की मरीज को यवतमाल से मेडिकल रेफर किये जाने के दौरान आगे के इलाज के लिए कोई सूचना नहीं दी गयी थी.जबकि बच्ची की जो हालत थी उसका यवतमाल में भी बेहतर इलाज संभव था.समिति ने जाँच के लिए कई नर्स और डॉक्टरों के बयान भी दर्ज किये है.इस समिति में सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ ब्रिजेश गुप्ता,मेडिकल सुप्रिडेन्डेन्ट डॉ शरद कुचेवार, डॉ वासुदेव बारसागड़े,डॉ मिलिंद व्यवहारे शामिल थे.