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Nagpur

मनपा चुनाव 2022: कांग्रेस नहीं चाहती उद्धव का साथ, टूट और सरकार जाने के बाद बदले हालात


नागपुर: एक तरफ राज्य में जारी सत्ता संघर्ष सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया है। यह अभी भी चल रही तिथि वेतन तिथि है। इसलिए असली शिवसेना कौन है और क्या है, इसको लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। इस पर शिंदे समूह का कहना है कि असली शिवसेना (Shivsena) हमारी है, वहीं बीजेपी भी कहती है कि शिंदे ही शिवसेना के असली वारिस हैं, लेकिन इसी उलझन में उद्धव ठाकरे (Udhav Thackeray) नागपुर में होने वाले चुनाव (Nagpur Municipal Corporation Election 2022) की अनदेखी करते नजर आ रहे हैं। वहीं सरकार में उनके साथ रही कांग्रेस ने आगामी मनपा चुनाव में उद्धव का साथ लेने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस नेताओं को लगता है। शिवसेना में टूट के पहले ही कोई जनाधार शहर में नहीं था, वहीं आज की हालत में असली शिवसेना कौनसी है यही नहीं पता है। हम शहर में अपने दम पर मनपा की सत्ता पा सकते हैं।  वहीं एनसीपी भी शिवसेना के साथ कब तक रहेगी इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

उद्धव सेना को नहीं चाहती कांग्रेस?


शिवसेना की पहचान अभी तय नहीं हुई है। दोनों गुट दावा कर रहे हैं कि 'हमारी अपनी सेना असली है'। इसलिए कई पदाधिकारी इंतजार कर रहे हैं। वे सोच रहे हैं कि किस शिवसेना के साथ रहें। ऐसी अराजक स्थिति में अगर नागपुर मनपा चुनाव की घोषणा हो जाती है तो यह उद्धव ठाकरे की सेना के लिए एक समस्या होगी। एकनाथ शिदे सेना और बीजेपी ने गठबंधन का ऐलान कर दिया है जिससे शिवसैनिकों को बड़ा झटका लगा है। चूंकि नागपुर मनपा में शिवसेना की पकड़ नहीं है, ऐसे में देखा जा रहा है कि नागपुर नगर निगम के क्षेत्र में उद्धव सेना की स्थिति एकाकी होगी क्योंकि कांग्रेस भी नहीं चाहती कि शिवसेना उसके साथ रहे।

चतुर्वेदी पर कांग्रेस-राष्ट्रवादियों का अविश्वास?


शिवसेना के नागपुर संपर्क प्रमुख दुष्यंत चतुर्वेदी के नेतृत्व पर कांग्रेस और राकांपा के पदाधिकारियों को भरोसा नहीं है।  इसलिए कोई स्थानीय स्तर पर शिवसेना से बातचीत तक नहीं कर रहा था। अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर शिवसेना के साथ गठबंधन उनके बीच गुटबाजी के फायदे से ज्यादा नुकसानदेह है। संचार प्रमुख और नगर प्रमुख प्रमोद मनमोडे और किशोर कुमेरिया भी आमने-सामने हैं। वहीं पूर्वी नागपुर विधानसभा क्षेत्र को प्रवीण बर्दे से हटाए जाने से शहर के नेताओं में विवाद पैदा हो गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ऐसे में शिवसेना से गठबंधन करना अपनी जान लेने जैसा होगा।

महाविकास अघाड़ी का गणित टूटा


जब राज्य में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सत्ता में थी, तब भाजपा को हराने के लिए मनपा सहित सभी स्थानीय निकायों के चुनाव संयुक्त रूप से लड़ने के प्रयास किए जा रहे थे। इस पर राकांपा नेता शरद पवार ने भी हामी भरी। शिवसेना को भी मुंबई में कांग्रेस और राकांपा की जरूरत है। इसलिए तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी समझौता करने की तैयारी को स्वीकार किया था। लेकिन नागपुर में कांग्रेस ने महाविकास अघाड़ी को स्वीकार नहीं किया। स्थानीय नेता शुरू से ही इसके खिलाफ थे। शिवसेना दो पार्षदों और राकांपा एक पार्षद की पार्टी होने के कारण कांग्रेस नेताओं ने उनके लिए पचास सीटें छोड़ने से इनकार कर दिया और अब भी करते हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले भी राकांपा से गठबंधन करने के खिलाफ हैं।