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Nagpur: MKCL का करार रद्द करने के बाद भी RTMNU का नियोजन नहीं सुधरा, परीक्षा व नामांकन की प्रक्रिया रूकी


नागपुर: प्रोमार्क का काम रोककर एमकेसीएल को देना व जिसके बाद एमकेसीएल पर भी पाबंदी लगाने के कारण नागपुर विवि का नियोजन पुरी तरह से गडबडा गया है. दोनों कंपनियों पर रोक लगाने के कारण नामांकन व परीक्षा के कार्य रूक गये है. परिणामवश शितकाल की परीक्षा को लेकर संभ्रम बना हुआ है. 

नागपुर विवि ने नामांकन व परीक्षा के कामकाज के लिये सबसे पहले एमकेसीएल कंपनी को नियुक्त किया गया था. परंतु एमकेसीएल की लचर कार्यप्रणाली के चलते कंपनी का काम रोका गया था. जिसके बाद यह काम प्रोमार्क नामक कंपनी को दिया गया. बिते पांच से छह वर्ष से प्रोमार्क कंपनी यह काम चल रहा थी. किंतु शिक्षा सत्र 2021-22 में युजी व पीजी प्रथम चरण के प्रवेश व परीक्षा की जिम्मेदारी एमकेसीएल को अचानक सौंपी गई. व्दितीय व तृतीय वर्ष का काम प्रोमार्क कंपनी की और कायम था. इस चरण से एमकेसीएल की और प्रथम वर्ष के साथ ही व्दितीय वर्ष की भी जिम्मेदारी थी.

एमकेसीएल पर उठे थे सवाल

बिते वर्ष से एमकेसीएल कंपनी प्रवेश व परीक्षा का कामकाज संभाल रही है. मात्र कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर शुरू से ही शिकायतों का दौर जारी था. कालेजों ने भी अपने तकलिफ के संदर्भ में विवि को अवगत कराया था. किंतु विवि के अधिकारियों ने इस और ध्यान नहीं दिया, बल्की एमकेसीएल को अधिकारियों ने पनाह दी. बिते वर्ष ली गई विंटर 2022 परीक्षा की अंकसुची अब तक कॉलेजों को प्राप्त नहीं हुई है. वहीं समर 2022 की परीक्षा होकर दो माह से अधिक का समयावधि होने के बावजूद पुरे परिणाम अब तक घोषित नहीं हुए है. दुसरी और सरकार ने एमकेसीएल के कार्य को लेकर आपत्ती जताते हुए जांच के आदेश दिये है.दरमियान विवि ने एमकेसीएल को पत्र देकर उनके काम पर रोक लगाई है.

कॉलेज व विवि कर्मी परेशान

एक और एमकेसीएल का काम रोका गया है. दुसरी और प्रोमार्क कंपनी को अनुमती नहीं दी गई. शिक्षा सत्र का आधा सेशन बित चुका है. ऐसे में परीक्षा फॉर्म सहित नामांकन की प्रक्रिया पुरी होनी चाहिएं थी. परंतु यह प्रक्रिया नवम्बर माह लगने के बाद भी पुर्ण नहीं हुई है. बिते वर्ष का प्रथम सत्र का डाटा एमकेसीएल के पास है. यह छात्र इस वर्ष तृतीय चरण में गये है.इस वर्ष के प्रथम चरण के छात्र का डाटा भी एमकेसीएल के पास है. ऐसे में विवि व्दारा दुसरे कंपनी को ठेका देने पर दो वर्ष का डाटा कैसे मिलेगा, यह प्रश्न भी कॉलेज व विवि कर्मीयों के सामने उपस्थित हुआ है. इसके पुर्व भी एमकेसीएल ने अपना पुराना डाटा विवि को नहीं दिया था. जिससे विवि का संपुर्ण कामकाज ही इस वर्ष गडबडाने के आसार नजर आ रहे है. ऐसे में कॉलेज के कर्मीयों की तकलीफ भी बढनेवाली है.