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Nagpur

स्मरण: साऊथ के मुक़ाबले मराठी फिल्में रिअलिस्टिक नहीं होती इस सवाल को सुनकर झल्ला गए थे विक्रम गोखले


दिव्येश द्विवेदी 
वरिष्ठ अभिनेता और रंगमंच की दुनिया के सुरमा विक्रम गोखले अब हमारे बीच नहीं है.उनकी कलाकारी की जितनी दाद दी जाये उतनी कम,मेरे जैसे एक अदने से आदमी के लिए उनके लिए कुछ कहना ही छोटे मुँह बड़ी बात होगी। अब जब गोखले हमारे बीच नहीं है बची है तो सिर्फ उनसे जुड़ी यादें जो लोग संवाद के अलग-अलग माध्यमों के माध्यम से साझा कर रहे है.ऐसे में उनसे जुड़ा एक स्मरण मेरा भी है जो साझा कर रहा हूँ.
 
ठीक से तो याद नहीं पर बात शायद वर्ष 2011-12 की है UCN NEWS के नागपुर स्थित स्टूडियो में स्वर्गीय विक्रम गोखले साक्षात्कार के लिए आये थे.उन दिनों UCN NEWS का सबसे मजबूत पहलू था जो आज भी है समाज के प्रतिष्ठित लोगों से UCN NEWS अपने दर्शकों को फोन इन कार्यक्रम के माध्यम से जोड़ता था.इसके अंतर्गत लोग हमारे स्टूडियों में मौजूद गेस्ट से सीधे फ़ोन के जरिये संवाद साधते थे.विक्रम गोखले हमारे स्टूडियो में थे दोपहर का वक़्त था वो हमारे यहाँ आने वाले है और दर्शकों से संवाद के लिए LIVE उपलब्ध रहेंगे यह सूचना पहले से ही प्रसारित की जा चुकी थी.मेरे वरिष्ठ सहयोगी एन व्ही शर्मा गोखले का साक्षात्कार ले रहे थे. साक्षात्कार शुरू हुआ दर्शकों के फोन आने भी शुरू हो गए थे लेकिन एक दो फोन कॉल में तकनीकी वजहों से दर्शकों की आवाज क्लियर नहीं आ रही.साक्षात्कार में शुरू संवाद में व्यवधान हो रहा था इसलिए प्रोडक्शन के सहकर्मियों ने कहा की ऑफिस के ही अन्य लैंडलाइन नंबर से स्टूडियो में फोन किया जाये इशारा मेरी तरफ हुआ न्यूज़ रूम से मैंने प्रोडक्शन के नंबर पर फोन किया जहा से कॉल को अंदर स्टूड़ियो में ट्रांसफर किया गया.उस समय मै नया-नया ही इस प्रोफेशन में आया था.पता नहीं मेरा सवाल जायज़ था भी या नहीं मैंने तड़ाक से उसे पूछ लिया।पहले तो गोखले मेरा सवाल सुनकर लगभग झल्ला गए फिर मेरा नाम पूछा और बड़े प्यार से समझाते हुए मेरे सवाल का ज़वाब दिया।
 
मेरा सवाल दो सिरे का था एक तो मराठी सिनेमा को दर्शक क्यों नहीं मिलते और दूसरा देश में ही साऊथ के ही साथ अन्य फिल्म इंड्रस्टी की आर्ट फिल्में मराठी से ज़्यादा रिअलिस्टिक होती है.और वहाँ के दर्शक अपनी फिल्मों को लेकर ज्यादा संजीदा होती है.इस पर पहले तो गोखले ने लगभग मुझे प्यार भरी फटकार लगाई और बोलें की आप महाराष्ट्र में रहते है तो अपनी चीजों को सहेजने की ज़िम्मेदारी आम की है.मराठी फिल्म इंड्रस्टी शानदार फिल्में तैयार करती है लेकिन यह हमारी नाकामी है की हम अच्छी फिल्मों अच्छी चीजों के लिए पैसे नहीं खर्च करना चाहते। दर्शक अगर अच्छा चाहेगा तो उसे अच्छा मिलेगा,हमें ( इंड्रस्टी के लोगों ) को मजबूर  होकर आप के लिए अच्छी फिल्में बनाई ही पड़ेगी। इस संवाद में उन्होंने लगभग मुझे हड़काया था की मराठी फिल्में तुम देखों।
 
समय-समय पर हम संवाद करते रहते है लेकिन कुछ संवाद अविस्मरणीय होते है मेरे जीवन के ऐसे ही कुछ चुनिंदा एक संवादों में फोन के माध्यम से स्वर्गीय विक्रम गोखले से हुआ यह संवाद था.एक बात तय थी की विक्रम गोखले अपनी संस्कृति के लिए बेहद सजग और गौरव का अनुभव करने वाले व्यक्ति थे.उनका एक अन्य साक्षात्कार जिसमे वो कहते है इस देश में जब हमारा सही इतिहास पढ़ाया जाने लगेगा और स्कूली पाठ्क्रमों में यह बताया जायेगा की बाबर से पहले हमारे महापुरुष कितने महान थे तो हम उस कहानियों को सुनकर बिना रोये नहीं रह पायेंगे।
 
स्वर्गीय विक्रम गोखले आप को शत शत नमन