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Nagpur

संघ के कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे सरकारी अधिकारी, केंद्र सरकार ने 58 साल पुराना नियम बदला


नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के स्वयंसेवकों को लेकर केंद्र सरकार (Central Government) ने बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत अब सरकारी सेवाओं में शामिल स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में शामिल हो सकेंगे। सरकार ने 53 साल पुराने उस कानून को बदल दिया है, जिसमें सरकारी सेवाओं में शामिल स्वयं सेवकों को शाखाओं में शामिल होने पर प्रतिबंध लगाया था। रविवार को इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी है।

सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि, "उपर्युक्त निर्देशों की समीक्षा की गई और यह निर्णय लिया गया है कि 30 नवंबर 1966, 25 जुलाई 1970 और 28 अक्टूबर 1980 के संबंधित कार्यालय ज्ञापनों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उल्लेख हटा दिया जाए।"

कब और क्यों लगाया था प्रतिबंध?

7 नवंबर 1966 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रमों में सरकारी कर्मचारियों के शामिल होने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। यह आदेश दिल्ली में हुए गौ-रक्षा आंदोलन के दौरान हिंसा के बाद आया था, जिसमें कई संत और गौ-भक्त मारे गए थे। इस हिंसा के बाद सरकार ने निर्णय लिया कि सरकारी कर्मचारी RSS के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकते हैं।

कांग्रेस ने उठाये सवाल

केंद्र के इस फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, "फरवरी 1948 में गांधीजी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद अच्छे आचरण के आश्वासन पर प्रतिबंध को हटाया गया। इसके बाद भी RSS ने नागपुर में कभी तिरंगा नहीं फहराया। 1966 में, RSS की गतिविधियों में भाग लेने वाले सरकारी कर्मचारियों पर प्रतिबंध लगाया गया था - और यह सही निर्णय भी था। यह 1966 में बैन लगाने के लिए जारी किया गया आधिकारिक आदेश है। 4 जून 2024 के बाद, स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री और RSS के बीच संबंधों में कड़वाहट आई है। 9 जुलाई 2024 को, 58 साल का प्रतिबंध हटा दिया गया जो अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान भी लागू था। मेरा मानना है कि नौकरशाही अब निक्कर में भी आ सकती है।"

इंदिरा गाँधी खुद बैन हटाना चाहती थी

कांग्रेस के विरोध पर भाजपा ने भी पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता अमित मालवीय ने लिखा कि, "58 साल पहले 1966 में जारी किया गया असंवैधानिक आदेश, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया गया था, मोदी सरकार ने वापस ले लिया है। मूल आदेश को पहले ही पारित नहीं किया जाना चाहिए था।

यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया था क्योंकि 7 नवंबर 1966 को संसद में गोहत्या के खिलाफ़ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। आरएसएस-जनसंघ ने लाखों लोगों का समर्थन जुटाया था। पुलिस की गोलीबारी में कई लोग मारे गए। 30 नवंबर 1966 को आरएसएस-जनसंघ के प्रभाव से हिलकर इंदिरा गांधी ने सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया।"

मालवीय ने आगे लिखा, "इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद फरवरी 1977 में आरएसएस से संपर्क किया था और नवंबर 1966 में लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की पेशकश की थी, बदले में उनके चुनाव अभियान के लिए उनका समर्थन मांगा था। इसलिए, बालक बुद्धि और कंपनी को अंतहीन शिकायत करने से पहले कांग्रेस का इतिहास जान लेना चाहिए।"