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Nagpur

RTMNU प्राध्यापक ब्लैकमेल केस: विश्वविद्यालय प्रशासन ने मांगा डॉ. धवनकर से जवाब, पीआरओ पद से हटाया


नागपुर: विश्वविद्यालय के सात प्राध्यापकों ने जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. धर्मेश धावनकर पर बदनामी का डर दिखाकर 15.50 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। प्राध्यापकों के लगाए इस आरोप पर कुलगुरु डॉ. शुभाष चौधरी ने कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से धवनकर को विश्वविद्यालय पीआरओ पद से हटा दिया है। इसी के साथ इस मामले में जवाब भी मांगा है। सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए इस बात की जानकारी दी। इसी के साथ उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात भी कही। 

कुलगुरु ने बताया कि, मामले को गंभीरता से लेते हुए हमने धवनकर से जवाब मांगा है। इसी के साथ ही हमने एक जांच शुरू कर दी है। स्पष्टीकरण आते ही हम प्राथमिक जांच शुरू करने के किये कमिटी बनाने का निर्णय लिया है। उसकी रिपोर्ट के बाद हम डिपार्टमेंटल जांच शुरू करेंगे।" उन्होंने आगे बताया कि, “जितने भी प्राध्यापकों से पैसे वसूल किये गए हैं। किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी। सबसे महत्वपूर्ण ऐसी कोई विश्वविद्यालय ने ऐसी किसी समिति का गठन भी नहीं किया है।” 

बदनामी का डर दिखाकर की उगाई

कुलपति के पास दर्ज कराई शिकायत में सातो प्राध्यापकों ने कहा कि, डॉ. धवनकर ने बताया कि, सात लोगों के खिलाफ कुछ लड़कियों द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है। उसके आधार पर लीगल सेल की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि, मुझे दो वकीलों के साथ शामिल किया गया है। दोनों वकील मेरे अच्छे दोस्त हैं। मैं आपको बाहर निकाल लूंगा। इसके उन्हें खर्च करना पड़ेगा।

प्राध्यापकों ने बताया कि, उन्होंने हमसे प्रत्येक 10 लाख रुपये देने को कहा था। हालांकि, मोल भाव के बाद किसी से पांच तो किसी से सात लाख देने का तय किया। धवनकर ने हमें बताया कि, इन पैसों में जूनियर को 2 लाख और सीनियर वकील को 5 लाख देने की बात कही थी। सभी प्राध्यापकों ने धवनकर को कुल 15.50 लाख रुपये दे दिए। लेकिन कुछ दिन बाद फिर से पैसे की मांग करने लगे। वहीं नहीं देने पर केस दोबारा शुरू हो जाएगा इसकी धमकी दी। 

पहले भी लग चुके हैं कई आरोप 

डॉ. धवनकर का करियर काफी विवादित रहा है। यह पहली बार नहीं है जब उन पर पैसे लेने का आरोप लगा है। जब वह जान संचार विभाग के प्रमुख थे उस समय छात्रों ने उन पर टूर के पैसे गबन करने का आरोप लगाया था। इसी के साथ उन्हें कई महीनों के लिए सस्पेंड भी किया जा चुका है। हालांकि, बाद में इन सब मामलों में उन्हें राहत मिल गई थी। धवनकर पर पीएचडी स्कॉलर्स से पैसे निकालने के भी आरोप लग चुके हैं।